वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो
Enjoy Every Movement of life!
वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो
“खैरात में मिली जिंदगी की इनायत नहीं किया करते..
किस्मत में ना हो, उसके लिए शिकायत नहीं किया करते..
उसने जिसको जो दिया है, सोच समझकर दिया है..
उसका फैसला सुना करते हैं, उसे हिदायत नहीं दिया करते…”
Shayari Har Dil Mein,
Umang Bhar Deti Hai
Jo Kabhi Berang The, Un Dilon Mein Bhi,
Mohabbat Ke Rang Bhar Deti Hai.