वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो
Enjoy Every Movement of life!
वो शमा की महफ़िल ही क्या,
जिसमे दिल खाक ना हो,
मज़ा तो तब है चाहत का,
जब दिल तो जले, पर राख ना हो
Thokar sahi, chaahe jaan nikle raahi me, bas
manzil wo ho jo garoor bankar saath chale
ठोकर सही, चाहे जान निकले राहों में, बस,
मंज़िल वो हो जो गुरूर बनकर साथ चले...
