beaabaroo hoke mahephil se nikal gaye ham,
kisee aur kee aabaroo kee khaatir…
बेआबरू होके महेफिल से निकल गये हम,
किसी और की आबरू की खातिर…
beaabaroo hoke mahephil se nikal gaye ham,
kisee aur kee aabaroo kee khaatir…
बेआबरू होके महेफिल से निकल गये हम,
किसी और की आबरू की खातिर…
कुछ अधूरे ख़्वाब जगा जाते हो,
मायूस चेहरे की मुस्कान जगा जाते हो...
सुबह पहली किरण भी तुम्हारी सादगी देखने आती है,
सांझ की रौशनी तुम्हारी जुल्फों में खो जाती है...
हवाएं तुमसे खुशबू लेकर चल रही हैं,
वो तितलियां भी तुम्हारे लबों सी खिल रही है...
कैसे बताऊं तुम्हे जैसे तुम इक किस्सा हो,
मेरी ज़िन्दगी हो मेरा इक हिस्सा हो...