Aadat badal gayi hai waqt katne ki
Ab himmat nahi hoti kisiko dard batne ki…❣️
आदत बदल गयी है वक्त बाटने की,
अब हिम्मत नही होती किसीको दर्द बाटने की…❣️
Aadat badal gayi hai waqt katne ki
Ab himmat nahi hoti kisiko dard batne ki…❣️
आदत बदल गयी है वक्त बाटने की,
अब हिम्मत नही होती किसीको दर्द बाटने की…❣️
ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है
बिछड़ के तुझ से न ख़ुश रह सकूँगा सोचा था
तिरी जुदाई ही वज्ह-ए-नशात हो गई है
बदन में एक तरफ़ दिन तुलूअ’ मैं ने किया
बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र
मैं नज़्म लिखने लगा था कि ना’त हो गई है
Bichadne ki itni jaldi thi use
Khud ko adha shod gya mujhmein❤️🩹
बिछड़ने की इतनी जल्दी थी उसे
खुद को आधा छोड़ गया मुझमे❤️🩹