Skip to content

Aadat gam chupane ki || sad but true hindi shayari

Ek baat hai jo kabse humein, samajh nhi aa rhi..
Aadat gam chupane ki humse, badli nhi ja rhi..
Dekha hai logo ko bant te huye, gam dusro ke sath..
Kaash baant le mera bhi koi, ab aur chupane ki, jagah na rahi…💔

एक बात है जो कबसे हमें, समझ नहीं आ रही..
आदत गम छुपाने की हमसे, बदली नहीं जा रही..
देखा है लोगों को बांटते हुए, गम दूसरों के साथ..
काश बांट ले मेरा भी कोई, अब और छुपाने की, जगह ना रही…💔

Title: Aadat gam chupane ki || sad but true hindi shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Dost || hindi poetry

सर में सौदा भी नहीं दिल में तमन्ना भी नहीं
लेकिन इस तर्क-ए-मोहब्बत का भरोसा भी नहीं
दिल की गिनती न यगानों में न बेगानों में
लेकिन उस जल्वा-गह-ए-नाज़ से उठता भी नहीं
मेहरबानी को मोहब्बत नहीं कहते ऐ दोस्त
आह अब मुझ से तिरी रंजिश-ए-बेजा भी नहीं
एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं
आज ग़फ़लत भी उन आँखों में है पहले से सिवा
आज ही ख़ातिर-ए-बीमार शकेबा भी नहीं
बात ये है कि सुकून-ए-दिल-ए-वहशी का मक़ाम
कुंज-ए-ज़िंदाँ भी नहीं वुसअ’त-ए-सहरा भी नहीं
अरे सय्याद हमीं गुल हैं हमीं बुलबुल हैं
तू ने कुछ आह सुना भी नहीं देखा भी नहीं
आह ये मजमा-ए-अहबाब ये बज़्म-ए-ख़ामोश
आज महफ़िल में ‘फ़िराक़’-ए-सुख़न-आरा भी नहीं
ये भी सच है कि मोहब्बत पे नहीं मैं मजबूर
ये भी सच है कि तिरा हुस्न कुछ ऐसा भी नहीं
यूँ तो हंगामे उठाते नहीं दीवाना-ए-इश्क़
मगर ऐ दोस्त कुछ ऐसों का ठिकाना भी नहीं
फ़ितरत-ए-हुस्न तो मा’लूम है तुझ को हमदम
चारा ही क्या है ब-जुज़ सब्र सो होता भी नहीं
मुँह से हम अपने बुरा तो नहीं कहते कि ‘फ़िराक़’
है तिरा दोस्त मगर आदमी अच्छा भी नहीं

Title: Dost || hindi poetry


Tumko maloom ham kitna || intejaar shayari hindi

Tumko nhi malum hum kitna pyaar krte hai
Isliye bas tumara din aur raat intjaar krte hai

Tumko nhi malum hum kitna pyaar krte hai
Isliye bas tumara din aur raat intjaar krte hai