
Aafat e Ohda naraz hona..!!

ये साफ सफाई की बात नहीं, कोरोना ने लिखी खत।
इधर उधर थुकना मत।
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गंगा की गोद में चलती है नाव, मृत शरीर भी।
समय का गोद में खिलती है सभ्यता और जंगली जानवर का अँधा बिस्वास भी।
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बचपन मासूम कली।
फल बनना और बड़ा होना- काला दाग में अशुद्ध कलि।
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कीचड़ में भी कमल खिलता है।
अच्छे घर में भी बिगड़ा हुआ बच्चा पैदा होते है।
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इंसान का अकाल नहीं, इंसानियत की अकाल है।
डॉक्टर (सेवा) के अकाल नहीं, वैक्सीन (व्यवस्था) का अकाल है।
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कुत्ते समझते है के कौन इंसान और कौन जानवर है।
बो इंसान को देख के पूंछ हिलाते है और जानवर को देख के भूँकते है।
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जीविका से प्यारा है जिंदगी।
अगर साँस बंद है तो कैसे समझेंगे रोटी की कमी।
jis titli ne mere dil de baag vich
kujh din c guzaare
ohnu laghe na mere chandi de gulaab piyaare
ohnu taan chahide c koi sone de sitaare
ਜਿਸ ਤਿਤਲੀ ਨੇ ਮੇਰੇ ਦਿਲ ਦੇ ਬਾਗ ਵਿੱਚ
ਕੁਝ ਦਿਨ ਸੀ ਗੁਜਾਰੇ
ਉਹਨੂੰ ਲੱਗੇ ਨਾ ਮੇਰੇ ਚਾਂਦੀ ਦੇ ਗੁਲਾਬ ਪਿਆਰੇ
ਉਹਨੂੰ ਤਾਂ ਚਾਹੀਦੇ ਸੀ ਸੋਨੇ ਦੇ ਸਿਤਾਰੇ