आहट नहीं थी, सुर्ख़ हवाओं में वक्त ना लगा,
वक्त कम था, वो लम्हा गुजरने में वक्त ना लगा,
मैं वक्त का तकाज़ा ले कर बैठा था
चंद खुशियों के इंतजार में,
मेरा घर टूट के बिखरने में वक्त न लगा...
आहट नहीं थी, सुर्ख़ हवाओं में वक्त ना लगा,
वक्त कम था, वो लम्हा गुजरने में वक्त ना लगा,
मैं वक्त का तकाज़ा ले कर बैठा था
चंद खुशियों के इंतजार में,
मेरा घर टूट के बिखरने में वक्त न लगा...
बादशाह अकबर और बीरबल शिकार पर गए हुए थे। उनके साथ कुछ सैनिक तथा सेवक भी थे। शिकार से लौटते समय एक गांव से गुजरते हुए बादशाह अकबर ने उस गांव के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। उन्होंने इस बारे में बीरबल से कहा तो उसने जवाब दिया—”हुजूर, मैं तो इस गांव के बारे में कुछ नहीं जानता, किंतु इसी गांव के किसी बाशिन्दे से पूछकर बताता हूं।”
बीरबल ने एक आदमी को बुलाकर पूछा—”क्यों भई, इस गांव में सब ठीक-ठाक तो है न?”
उस आदमी ने बादशाह को पहचान लिया और बोला—”हुजूर आपके राज में कोई कमी कैसे हो सकती है।”
“तुम्हारा नाम क्या है?” बादशाह ने पूछा।
“गंगा”
“तुम्हारे पिता का नाम?”
“जमुना”
“और मां का नाम सरस्वती है?”
“हुजूर, नर्मदा।”
यह सुनकर बीरबल ने चुटकी ली और बोला—”हुजूर तुरन्त पीछे हट जाइए। यदि आपके पास नाव हो तभी आगे बढ़ें वरना नदियों के इस गांव में तो डूब जाने का खतरा है।”
यह सुनकर बादशाह अकबर हंसे बगैर न रह सके।
Kise de jazbaat bhare bharaya reh jande ne,
Koi bole himmat kar ke taan chup de hisse reh jande ne
Koi baith ke Rowe haneri raat vich,
Kyi pagl Haase de hisse reh jande ne
Karni kadar chahidi rooh de premi di,
Ajjkal pyar jisam de hisse reh jande ne
Kise kise nu sohbat mildi sajjan di,
Nahi taan ban kaav-kisse reh jande ne🙌
ਕਿਸੇ ਦੇ ਜਜ਼ਬਾਤ ਭਰੇ ਭਰਾਇਆ ਰਹਿ ਜਾਦੇ ਨੇ,
ਕੋਈ ਬੋਲੇ ਹਿੰਮਤ ਕਰਕੇ ਤਾਂ ਚੁੱਪ ਦੇ ਹਿੱਸੇ ਰਹਿ ਜਾਦੇ ਨੇ।
ਕੋਈ ਬੈਠ ਕੇ ਰੋਵੇ ਹਨੇਰੀ ਰਾਤ ਵਿੱਚ,
ਕਈ ਪਾਗਲ ਹਾਸੇ ਦੇ ਹਿੱਸੇ ਰਹਿ ਜਾਦੇ ਨੇ।
ਕਰਨੀ ਕਦਰ ਚਾਹੀਦੀ ਰੂਹ ਦੇ ਪ੍ਰੇਮੀ ਦੀ,
ਅੱਜ-ਕੱਲ੍ਹ ਪਿਆਰ ਜਿਸਮ ਹਿੱਸੇ ਰਹਿ ਜਾਦੇ ਨੇ।
ਕਿਸੇ-ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਸੋਹਬਤ ਮਿਲਦੀ ਸੱਜਣ ਦੀ,
ਨਹੀ ਤਾਂ ਬਣ ਕਾਵਿ-ਕਿੱਸੇ ਰਹਿ ਜਾਦੇ ਨੇ।🙌