
Dunghi satt te seene te fatt khane painde ne..!!

Kinka kinka ikatha kar mein jazbatan nu masa judeya..!!
Yaar diyan badneetiyan ne fer esa rukh modeya😢..!!
Bekadar jehe ho te bedard jehe ban ke
Nazuk sada dil shreaam ohna todeya💔..!!
ਕਿਣਕਾ ਕਿਣਕਾ ਇਕੱਠਾ ਕਰ ਮੈਂ ਜਜ਼ਬਾਤਾਂ ਨੂੰ ਮਸਾਂ ਜੋੜਿਆ..!!
ਯਾਰ ਦੀਆਂ ਬਦਨੀਤੀਆਂ ਨੇ ਫਿਰ ਐਸਾ ਰੁੱਖ ਮੋੜਿਆ😢..!!
ਬੇਕਦਰ ਜਿਹੇ ਹੋ ਤੇ ਬਦਰਦ ਜਿਹੇ ਬਣ ਕੇ
ਨਾਜ਼ੁਕ ਸਾਡਾ ਦਿਲ ਸ਼ਰੇਆਮ ਉਹਨਾਂ ਤੋੜਿਆ💔..!!
बादशाह अकबर और बीरबल शिकार पर गए हुए थे। उनके साथ कुछ सैनिक तथा सेवक भी थे। शिकार से लौटते समय एक गांव से गुजरते हुए बादशाह अकबर ने उस गांव के बारे में जानने की जिज्ञासा हुई। उन्होंने इस बारे में बीरबल से कहा तो उसने जवाब दिया—”हुजूर, मैं तो इस गांव के बारे में कुछ नहीं जानता, किंतु इसी गांव के किसी बाशिन्दे से पूछकर बताता हूं।”
बीरबल ने एक आदमी को बुलाकर पूछा—”क्यों भई, इस गांव में सब ठीक-ठाक तो है न?”
उस आदमी ने बादशाह को पहचान लिया और बोला—”हुजूर आपके राज में कोई कमी कैसे हो सकती है।”
“तुम्हारा नाम क्या है?” बादशाह ने पूछा।
“गंगा”
“तुम्हारे पिता का नाम?”
“जमुना”
“और मां का नाम सरस्वती है?”
“हुजूर, नर्मदा।”
यह सुनकर बीरबल ने चुटकी ली और बोला—”हुजूर तुरन्त पीछे हट जाइए। यदि आपके पास नाव हो तभी आगे बढ़ें वरना नदियों के इस गांव में तो डूब जाने का खतरा है।”
यह सुनकर बादशाह अकबर हंसे बगैर न रह सके।