अभी मुश्किल है, कैसे बताऊ के दिल में क्या चल रहा है..
एक अजीब से उलझन में हूँ, दिल मेरा जैसे के जल रहा है..
ना जाने परेशानी की वजह है क्या, बेचैनी बड़ी अजब सी है..
ये खुद मेरी समझ से बाहर है, कुछ तो है जो खल रहा है..
अभी मुश्किल है, कैसे बताऊ के दिल में क्या चल रहा है..
एक अजीब से उलझन में हूँ, दिल मेरा जैसे के जल रहा है..
ना जाने परेशानी की वजह है क्या, बेचैनी बड़ी अजब सी है..
ये खुद मेरी समझ से बाहर है, कुछ तो है जो खल रहा है..
वक़्त तो अब लफ़्ज़ों में दिया जाता है,
रूबरू तो महज दिखावा किया जाता है
waqt to ab lafzo me diya jaata hai
roobroo to meha dikhawa kiya jaata hai