Enjoy Every Movement of life!
उठे थे हाथ जिनके,
उन्ही दुआओं का असर हूं,
चिराग़ सी हैं नज़रें मेरी
जैसे सुबह की पहली पहर हूं
धूल से ही तो नाता है मेरा
वहीं ठंडी हवाओं में बसर हूं
कलम से शायर कह दो
होंठों से कहर हूं,
ठहरा है दरिया जो किनारे में
वहीं बहता छोटा सा शहर हूं,
मानों तो प्यास मिले
ना मानों तो ज़हर हूं...
Dunghe ehsas dil de oh kade samjh hi nhi paye
Jinna piche asi nind chain sab gwa bethe..!!
ਡੂੰਘੇ ਅਹਿਸਾਸ ਦਿਲ ਦੇ ਉਹ ਕਦੇ ਸਮਝ ਹੀ ਨਹੀਂ ਪਾਏ
ਜਿੰਨਾਂ ਪਿੱਛੇ ਅਸੀਂ ਨੀਂਦ ਚੈਨ ਸਭ ਗਵਾ ਬੈਠੇ..!!
