me hun aisa koi gunaah karnaa
jis di sazaa bas tu howe
ਮੈਂ ਹੁਣ ਐਸਾ ਕੋਈ ਗੁਨਾਹ ਕਰਨਾ
ਜਿਸ ਦੀ ਸਜਾ ਬਸ ਤੂੰ ਹੋਵੇ…
me hun aisa koi gunaah karnaa
jis di sazaa bas tu howe
ਮੈਂ ਹੁਣ ਐਸਾ ਕੋਈ ਗੁਨਾਹ ਕਰਨਾ
ਜਿਸ ਦੀ ਸਜਾ ਬਸ ਤੂੰ ਹੋਵੇ…
हाथ थाम कर भी तेरा सहारा न मिला
में वो लहर हूँ जिसे किनारा न मिला
मिल गया मुझे जो कुछ भी चाहा मैंने
मिला नहीं तो सिर्फ साथ तुम्हारा न मिला
वैसे तो सितारों से भरा हुआ है आसमान मिला
मगर जो हम ढूंढ़ रहे थे वो सितारा न मिला
कुछ इस तरह से बदली पहर ज़िन्दगी की हमारी
फिर जिसको भी पुकारा वो दुबारा न मिला
एहसास तो हुआ उसे मगर देर बहुत हो गयी
उसने जब ढूँढा तो निशान भी हमारा न मिला🍂