बेहतर से बेहतर की तलाश करो,
मिल जाए नदी तो समंदर की तलाश करो,
टूट जाते हैं शीशे पत्थरों की चोट से,
तोड़ से पत्थर ऐसे शीशे की तलाश करो।
बेहतर से बेहतर की तलाश करो,
मिल जाए नदी तो समंदर की तलाश करो,
टूट जाते हैं शीशे पत्थरों की चोट से,
तोड़ से पत्थर ऐसे शीशे की तलाश करो।
jaise jaise din guzrenge bhul use hm jayenge
Lekin uske baad kisi se pyar nhi kar payenge
Lafzon se dil k andar ki aah byan kab hoti hai
Apne man ki peeda kaise hontho pe hum Layenge..!!
जैसे जैसे दिन गुजरेंगे भूल उसे हम जाऐंगे
लेकिन उसके बाद किसी से प्यार नही कर पाएंगे!
लफ्ज़ों से दिल के अंदर की आह ब्यां कब होती है!
अपने मन की पीडा़ कैसे होठों तक हम लाएंगे!!
खमियाज़ा ए ज़िन्दगी हर पल मिलता है,
कोई कुछ वक्त तो कोई ज़िन्दगी भर साथ चलता है...
मैं अपनी राहों पर अब अकेले निकाल आया हूं,
जो वक्त सबका था कुछ अपने लिए लाया हूं...
शीशे की कब्र में दफ्न जैसे कोई राज़ हूं,
बरसों से अनसुना जैसे कोई साज़ हूं...
ज़िन्दगी का हाथ थाम कर अब चलने की गुज़ारिश है,
सपनों से तर आगे समंदर और बारिश है...
इक दिन समंदर और बारिश भी पार कर जाऊंगा,
सबकी नज़रें होगी मुझपे और मैं ज़िन्दगी गुलज़ार कर जाऊंगा....