ਅੱਜ ਚੰਨ ਵੀ ਇਕੱਲਾ, ਤਾਰਿਆਂ ਦੀ ਬਰਾਤ ਵਿੱਚ
ਪਰ ਦਰਦ ਚੰਨ ਦਾ ਇਹ ਚੰਦਰੀ ਰਾਤ ਨਾ ਸਮਝੇ
aajh chan v ekala, tariyaan di baraat vich
par dard chan da eh chandri raat na samjhe
ਅੱਜ ਚੰਨ ਵੀ ਇਕੱਲਾ, ਤਾਰਿਆਂ ਦੀ ਬਰਾਤ ਵਿੱਚ
ਪਰ ਦਰਦ ਚੰਨ ਦਾ ਇਹ ਚੰਦਰੀ ਰਾਤ ਨਾ ਸਮਝੇ
aajh chan v ekala, tariyaan di baraat vich
par dard chan da eh chandri raat na samjhe
सौ ख्वाबों को मिला के एक ख्वाब देख रखा है ,
ज़िंदगी ने जाने फिर भी क्या हिसाब रखा है ,
तू मशरुफ़ है तेरी अहमत में,
और मैंने तेरे इंतज़ार को संभाल रखा है ।
माना दर्द की सौगात लाता है इश्क़ जाना ,
फिर भी मैंने अपनी मुलाकातों का गुलाब रखा है ,
तेरे साथ ही तो चल रहा है वजूद मेरा ,
तेरी यादों का मैंने एक तकियाँ भिगो रखा है ।
तेरा यू इंतज़ार करवाना ,मेरे दिल को खा जाता है ,
फिर भी तुझसे मिलने का अरमान सजा रखा है ,
कभी आओ खुल के सामने जो मेरे तुम तो दिखाऊ ,
टूटे दिल मे भी तेरे लिए एक महल सजा रखा है ।
………….अजय कुमार ।
