मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
मुर्शिद आज चराग़-ए-ग़म जलाऊँगा मैं
आज रात भर रात का दिल दुखाऊँगा मैं
आज किताब-ए-मुहब्बत के साथ साथ
तेरी निशानियों को भी आग लगाऊँगा मैं
ऐ सितमगर एहतियात-ए-हिजाब करना
अब फ़क़त तुझपे ही क़लम उठाऊँगा मैं
Bhuti lod nhi dilaseyan di rehan de o yara
Seh lawange ishq ch mili hoyi haar nu..!!
Le mann leya k tenu koi chahat nhi sadi
Asi sambhalange apne ikk tarfe pyar nu..!!
ਬਹੁਤ ਲੋੜ ਨਹੀਂ ਦਿਲਾਸਿਆਂ ਦੀ ਰਹਿਣ ਦੇ ਓ ਯਾਰਾ
ਸਹਿ ਲਵਾਂਗੇ ਇਸ਼ਕ ‘ਚ ਮਿਲੀ ਹੋਈ ਹਾਰ ਨੂੰ..!!
ਲੈ ਮੰਨ ਲਿਆ ਕਿ ਤੈਨੂੰ ਕੋਈ ਚਾਹਤ ਨਹੀਂ ਸਾਡੀ
ਅਸੀਂ ਸਾਂਭਲਾਂਗੇ ਆਪਣੇ ਇੱਕ ਤਰਫ਼ੇ ਪਿਆਰ ਨੂੰ..!!