
Par tenu pata nhi mein yaad vi haan ja nahi..!!

ithe lok nibhaunde bahut ghat ne
ajmaa ke vekh chadd jande ne saare
yaariyaa pyaar dhokha ki hunda
la taa lainde aa hashar jande hoye v saare
ਇਥੇ ਲੋਕ ਨਿਭਾਉਂਦੇ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਨੇ
ਅਜ਼ਮਾ ਕੇ ਵੇਖ ਛੱਡ ਜਾਂਦੇ ਨੇ ਸਾਰੇ
ਯਾਰੀਆਂ ਪਿਆਰ ਧੋਖਾ ਕੀ ਹੁੰਦਾ
ਲਾ ਤਾਂ ਲੈਂਦੇ ਆ ਹਸ਼ਰ ਜਾਣਦੇ ਹੋਏ ਵੀ ਸਾਰੇ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ
👧 *बाँझपन एक कलंक क्यों ???*👧
एक औरत माँ बने तो जीवन सार्थक
अगर माँ न बने तो जीवन ही निरथर्क,
किसने कहा है ये, कहाँ लिखा है ये,
कलंकित बोल-बोल जीवन बनाते नरक।
बाँझ बोलकर हर कोई चिढ़ाते,
शगुन-अपशगुन की बात समझाते।
बंजर ज़मीं का नाम दिया है मुझे,
पीछे क्या, सामने ही मेरा मज़ाक़ उड़ाते।
ममत्व का पाठ मैं भी जानती,
हर बच्चे को अपना मानती,
कोख़ से जन्म दूँ, ज़रूरी नहीं,
लहू का रंग मैं भी पहचानती।
आँचल में मेरे है प्यार भरा,
ममता की मूरत हूँ देख ज़रा,
क़द्र जानूँ मैं बच्चों की,
नज़र से मुझे ज़माने न गिरा।
कलंक नहीं हूँ इतना ज़रा बता दूँ,
समाज को एक नया पाठ सीखा दूँ,
बच्चा न जन्म दे सकी तो क्या,
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।
समाज पे बराबर का हक़ मैं जता दूँ।