Ik saanjh puraani
reejh puraani
dil ch vasauna tainu
asin soorman bnaa
dabbi vich pa
akh ch parauna tenu
ਇੱਕ ਸਾਂਝ ਪੁਰਾਣੀ,
ਰੀਜ ਨਿਮਾਣੀ,
ਦਿਲ ਚ ਵਸੋਣਾ ਤੈਨੂੰ,
ਅਸੀ ਸੁਰਮਾਂ ਬਣਾ,
ਡੱਬੀ ਵਿੱਚ ਪਾ,
ਅੱਖ ਚ ਪਰੋਣਾ ਤੈਨੂੰ
Ik saanjh puraani
reejh puraani
dil ch vasauna tainu
asin soorman bnaa
dabbi vich pa
akh ch parauna tenu
ਇੱਕ ਸਾਂਝ ਪੁਰਾਣੀ,
ਰੀਜ ਨਿਮਾਣੀ,
ਦਿਲ ਚ ਵਸੋਣਾ ਤੈਨੂੰ,
ਅਸੀ ਸੁਰਮਾਂ ਬਣਾ,
ਡੱਬੀ ਵਿੱਚ ਪਾ,
ਅੱਖ ਚ ਪਰੋਣਾ ਤੈਨੂੰ
Intezaar ki aarzu abh kho gai hai
khamoshiyo ki aadat ho gai hai
na shikwa raha na shikayat kisi se
agar hai to ek mohobat
jo in tanhaaiyo se ho gai hai
इंतज़ार की आरज़ू अब खो गयी है,
खामोशियो की आदत हो गयी है,
न शिकवा रहा न शिकायत किसी से,
अगर है तो एक मोहब्बत,
जो इन तन्हाइयों से हो गई है। 💘
अंकुर मिट्टी में सोया था सपने मै खोया था
नन्हा बीज हवा ने लाकर एक जगह बोया था।
तभी बीज ने ली अंगड़ाई देह जरा सी पाई
आंख खोलकर बाहर आया, दुनिया पड़ी दिखाई
खाद्य मिली पानी भी पाया ऐसे जीवन आया
ऊपर बड़ा इधर, धरती में नीचे उधर समाया।
तने डालिया पत्ते आए और फल मुस्कराए
नन्हा बीज वृक्ष बनकर धरती पर लहराए।
जीता मरता रोगी होता दुख आने पर सोता
वृक्ष सांस लेता बढ़ता है जगता है फिर सोता।
रोज शाम को चिड़िया आती सारी रात बिताती
बड़े सवेरे जाग वृक्ष, पर ची ची ची ची गाती।
छाया आती बड़ी सुआती सब टोली झूट जाती
तरह तरह के खेल वर्क्ष के नीचे बैठ रचती।