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AKH TERI ROI LAGI || punjabi shayari

TU DIL VICH SAJNA, KOI GALL LKOOI LAGDI YYYY,
TAINU KIS DI YAAD STAAWE AKH TERI ROI LAGDI YYYYY,.
DOOR GIYAA LAYI KIO HAAUNKE BHARDA REHNA YYYY
KISDA KHAT NIT KADKE EKALA PARRDA REHNA YYYYY,2
JISNU KEHNDE LOK MOHABAT TAINU HOI LAGDI YYYY,,,
TAINU KIS DI YAAD STAAWE  AKH  TERI ROI LAGDI YYYY,,,
MITAA NAHI  KOI NI SAKDA ,,,MATHE WALI LAKEER NU,,,,
AAKE HAAL TU PUCH LEH CHAHE MANVEER NU,,,,,
JISNU APNI KADE O KEHDA SI ,,HUN KOI LAGDI YYYY
TAINU KISDI YAAD  STAAWE AKH TERI ROI LAGDI YYY,,,,

Title: AKH TERI ROI LAGI || punjabi shayari

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


 जंगल की सैर

जग की हलचल तज उस ओर
जहाँ बसा है जंगल घोर
आओ आज वहां घूमेंगे
खुशियों में भरकर झूमेंगे
घने घने वन बने जहाँ पर
तरु समूह हैं तने जहाँ पर
जहाँ झाड़ियाँ खड़ी हुई हैं
पग पग बेलें पड़ी हुई हैं.
 
पथ है जहाँ बनाना मुश्किल
आदि अंत कुल पाना मुश्किल
जिसके भीतर जाना मुश्किल
जाकर के फिर आना मुश्किल
 
जंगल यह पशुओं का घर है
राजा जिनका शेर बबर है
कभी कभी जब वह दहाड़ता
आसमान के कान फाड़ता
 
इधर खड़ा है देखो चीता
झरने के तट पानी पीता
इसके तन पर काली धारी
यह है हिंसक मांसाहारी
 
देखों इधर तेंदुआ आता
बिल्ली का वंशज कहलाता
बिल्ली इसकी नानी लगती
किंतु देखते ही है भगती
 
हाथी सूंड उठाते हैं ये
ढेरों खाना खाते हैं ये
मस्त चाल से जाते हैं ये
वन में रौंद मचाते हैं ये
 
झाड़ी के अंदर खामोश
देखों बैठा है खरगोश
टूंग टूंग खाता है घास
कभी नहीं आता है पास
 
उधर हिरन भागे जाते है
चंचल ये मृग कहलाते हैं
पतली पतली इनकी टाँगें
कभी चौकड़ी कभी छंलागे
 
सुंदर इनके नयन सलौने
प्यारे लगते इनके छौने
सीधे सादे भोले भाले
जो भी चाहे इनको पाले
 

Title:  जंगल की सैर


roe to bahut || Very sad cry Hindi shayari

vo roe to bahut,
par mujhase mooh mod kar roe,
koee majabooree hogee to dil tod kar roe,
mere saamane kar die mere tasveer ke tukade,
pata chala mere peechhe vo unhe jod kar roe..

वो रोए तो बहुत, पर मुझसे मूह मोड़ कर रोए,
कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़ कर रोए,
मेरे सामने कर दिए मेरे तस्वीर के टुकड़े,
पता चला मेरे पीछे वो उन्हे जोड़ कर रोए..

Title: roe to bahut || Very sad cry Hindi shayari