
Meri rooh nu laggi sajjna esi Ishq tere di aadat..!!

Sog bhare mausm nu samet
Baddal ban ke shaa jawi..!!
Ujdi sukki dil di zamin te
Sawan ban ke aa jawi..!!
ਸੋਗ ਭਰੇ ਮੌਸਮ ਨੂੰ ਸਮੇਟ
ਬੱਦਲ ਬਣ ਕੇ ਛਾ ਜਾਵੀਂ..!!
ਉੱਜੜੀ ਸੁੱਕੀ ਦਿਲ ਦੀ ਜ਼ਮੀਨ ਤੇ
ਸਾਵਣ ਬਣ ਕੇ ਆ ਜਾਵੀਂ..!!
खमियाज़ा ए ज़िन्दगी हर पल मिलता है,
कोई कुछ वक्त तो कोई ज़िन्दगी भर साथ चलता है...
मैं अपनी राहों पर अब अकेले निकाल आया हूं,
जो वक्त सबका था कुछ अपने लिए लाया हूं...
शीशे की कब्र में दफ्न जैसे कोई राज़ हूं,
बरसों से अनसुना जैसे कोई साज़ हूं...
ज़िन्दगी का हाथ थाम कर अब चलने की गुज़ारिश है,
सपनों से तर आगे समंदर और बारिश है...
इक दिन समंदर और बारिश भी पार कर जाऊंगा,
सबकी नज़रें होगी मुझपे और मैं ज़िन्दगी गुलज़ार कर जाऊंगा....