आखिर वही उदासियाँ आखिर वही गिले!
काफ़िर वही उदासियाँ काफ़िर वही गिले!
हमको तुम्हारे इश्क़ ने बख्शे हैं बार बार!
फिर फिर वही उदासियाँ फिर फिर वही गिले!!
हर्ष
आखिर वही उदासियाँ आखिर वही गिले!
काफ़िर वही उदासियाँ काफ़िर वही गिले!
हमको तुम्हारे इश्क़ ने बख्शे हैं बार बार!
फिर फिर वही उदासियाँ फिर फिर वही गिले!!
हर्ष

कभी उसकी यादें ठहर जाती हैं आकर, कभी टकराकर चली जाती हैं..
कभी गमों में डूबाये रखती हैं मुझे, कभी हंसाकर चली जाती हैं..
आज भी वो मेरे आस-पास है, कभी ये अहसास दिलाकर चली जाती है..
कभी एक झलक उसकी पाने को तरसूं, दिल जला कर चली जाती है..
उसका सपनों में आना-जाना यूं है जैसे, झपकी आकर चली जाती है..
मैं सुकून भरी नींद के इंतजार में होता हूं, सबको आकर चली जाती है..