
Jina jin lyi sa una hi jruri mere li tu
Jis din na vikhe tu
Ma jina chad du
Teri akh vich meri duniya kde na modi tu
Ede bdle pave jan mngli tu
Tere tane vi ful lgde ta fula da bhag tu
Kde door na hovi
Pave pera ch rkh li tu

नफ़रत का भाव ज्यों ज्यों खोता चला गया, मैं रफ्ता रफ्ता आदमी होता चला गया। फिर हो गया प्यार की गंगा से तर बतर, गुजरा जिधर से सबको भिगोता चला गया। सोचा हमेशा मुझसे किसी का बुरा न हो, नेकी हुई तो दरिया में डुबोता चला गया। कटुता की सुई लेके खड़े थे जो मेरे मीत, सद्भावना के फूल पिरोता चला गया। जितना सुना था उतना जमाना बुरा नहीं, विश्वास अपने आप पर होता चला गया। अपने से ही बनती है बिगड़ती है ये दुनियां, मैं अपने मन के मैल को धोता चला गया। उपजाऊ दिल है बेहद मेरे शहर के लोग, हर दिल में बीज प्यार का बोता चला गया।...

chen udh gya dil da
naa neend rahi raatan di
tu kaisa rog la dita
aadat pe gai
teriyaan yaadan di, mulakaatan di