
baato hi baato me unse
baat huyi thi
yu to guzarti hai har roz ek shaam..
par jo unke sath safar me beeti wo alag hi
shaam huyi thi

दिल के दर्द का एहसास तब हुआ जब हमारी परछाईं भी हमसे रूठ गई,
अँधेरे से लगता था डर और अब इस अँधेरे से जैसे यारी हो गई,
धड़कनों की तड़प अब बन गई है इस दिल की एक लोरी,
अब न किसी खुशी का इंतज़ार है, न कोई उम्मीद, हमें तो दर्द से मोहब्बत हो गई।
अँधेरे से लगता था डर और अब इस अँधेरे से जैसे यारी हो गई,
धड़कनों की तड़प अब बन गई है इस दिल की एक लोरी,
अब न किसी खुशी का इंतज़ार है, न कोई उम्मीद, हमें तो दर्द से मोहब्बत हो गई।
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jaise jaise din guzrenge bhul use hm jayenge
Lekin uske baad kisi se pyar nhi kar payenge
Lafzon se dil k andar ki aah byan kab hoti hai
Apne man ki peeda kaise hontho pe hum Layenge..!!
जैसे जैसे दिन गुजरेंगे भूल उसे हम जाऐंगे
लेकिन उसके बाद किसी से प्यार नही कर पाएंगे!
लफ्ज़ों से दिल के अंदर की आह ब्यां कब होती है!
अपने मन की पीडा़ कैसे होठों तक हम लाएंगे!!