
baato hi baato me unse
baat huyi thi
yu to guzarti hai har roz ek shaam..
par jo unke sath safar me beeti wo alag hi
shaam huyi thi

उल्टे सीधे सपने पाले बैठे हैं
सब पानी में काँटा डाले बैठे हैं
इक बीमार वसीयत करने वाला है
रिश्ते नाते जीभ निकाल बैठे हैं
बस्ती का मामूल पे आना मुश्किल है
चौराहे पर वर्दी वाले बैठे हैं
धागे पर लटकी है इज़्ज़त लोगों की
सब अपनी दस्तार सँभाले बैठे हैं
साहब-ज़ादा पिछली रात से ग़ायब है
घर के अंदर रिश्ते वाले बैठे हैं
आज शिकारी की झोली भर जाएगी
आज परिंदे गर्दन डाले बैठे हैं
Husn ki barsaton me wo badal si banke ayii thi☁️
Sardi ki un raaton me wo chadar si banke ayii thi❣️
Pyaase ko paani mila Ana jab uska hua 😇
Sooni in ankhon me wo kajal si banke ayii thi😍
हुस्न की बरसातों में वो बादल सी बनके आयी थी☁️
सर्दी की उन रातों में वो चादर सी बनके आई थी❣️
प्यासे को पानी मिला आना जब उसका हुआ😇
सूनी इन आँखों में वो काजल बनके आयी थी😍