Ik tara zameen te ikalla reh gya
ambraan de tareyaan nu ginda reh gya
ਇਕ ਤਾਰਾ ਜ਼ਮੀਨ ਤੇ ਇਕੱਲਾ ਰਹਿ ਗਿਆ
ਅੰਬਰਾਂ ਦੇ ਤਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਗਿਣਦਾ ਰਹਿ ਗਿਆ
Ik tara zameen te ikalla reh gya
ambraan de tareyaan nu ginda reh gya
ਇਕ ਤਾਰਾ ਜ਼ਮੀਨ ਤੇ ਇਕੱਲਾ ਰਹਿ ਗਿਆ
ਅੰਬਰਾਂ ਦੇ ਤਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਗਿਣਦਾ ਰਹਿ ਗਿਆ
लिखता मैं किसान के लिए
मैं लिखता इंसान के लिए
नहीं लिखता धनवान के लिए
नहीं लिखता मैं भगवान के लिए
लिखता खेत खलियान के लिए
लिखता मैं किसान के लिए
नहीं लिखता उद्योगों के लिए
नहीं लिखता ऊँचे मकान के लिए
लिखता हूँ सड़कों के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
क़लम मेरी बदलाव बड़े नहीं लाई
नहीं उम्मीद इसकी मुझे
खेत खलियान में बीज ये बो दे
सड़क का एक गढ्ढा भर देती
ये काफ़ी इंसान के लिए
लिखता हूँ किसान के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
आशा नहीं मुझे जगत पढ़े
पर जगत का एक पथिक पढ़े
फिर लाए क्रांति इस समाज के लिए
इसलिए लिखता मैं दबे-कुचलों के लिए
पिछड़े भारत से ज़्यादा
भूखे भारत से डरता हूँ
फिर हरित क्रांति पर लिखता हूँ
फिर किसान पर लिखता हूँ
क्योंकि
लिखता मैं किसान के लिए
लिखता मै इंसान के लिए
भगवन का इन्साफ करने का तरीका बहुत अच्छा है, कुछ बुरे कर्म माँ बाप करते हैं लेकिन उसका फल संतान को मिलता है।
कुछ बुरे कर्म संतान करती है लेकिन उसका फल माँ बाप को मिलता है क्यूंकि कोई भी इतना अपने दुःख दर्द में नहीं तडपता जितना अपनों को दर्द में देखकर तड़पता है।
तो थोड़ा सोच कर चलिए बुरे कर्म करोगे आप, भुगतेंगे आपके अपने
Manisha❤️Mann✍️