Ik tara zameen te ikalla reh gya
ambraan de tareyaan nu ginda reh gya
ਇਕ ਤਾਰਾ ਜ਼ਮੀਨ ਤੇ ਇਕੱਲਾ ਰਹਿ ਗਿਆ
ਅੰਬਰਾਂ ਦੇ ਤਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਗਿਣਦਾ ਰਹਿ ਗਿਆ
Ik tara zameen te ikalla reh gya
ambraan de tareyaan nu ginda reh gya
ਇਕ ਤਾਰਾ ਜ਼ਮੀਨ ਤੇ ਇਕੱਲਾ ਰਹਿ ਗਿਆ
ਅੰਬਰਾਂ ਦੇ ਤਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਗਿਣਦਾ ਰਹਿ ਗਿਆ
है इश्क़ तो फिर असर भी होगा
जितना है इधर उधर भी होगा
माना ये के दिल है उस का पत्थर
पत्थर में निहाँ शरर भी होगा
हँसने दे उसे लहद पे मेरी
इक दिन वही नौहा-गर भी होगा
नाला मेरा गर कोई शजर है
इक रोज़ ये बार-वर भी होगा
नादाँ न समझ जहान को घर
इस घर से कभी सफ़र भी होगा
मिट्टी का ही घर न होगा बर्बाद
मिट्टी तेरे तन का घर भी होगा
ज़ुल्फ़ों से जो उस की छाएगी रात
चेहरे से अयाँ क़मर भी होगा
गाली से न डर जो दें वो बोसा
है नफ़ा जहाँ ज़रर भी होगा
रखता है जो पाँव रख समझ कर
इस राह में नज़्र सर भी होगा
उस बज़्म की आरज़ू है बे-कार
हम सूँ का वहाँ गुज़र भी होगा
‘शहबाज़’ में ऐब ही नहीं कुल
एक आध कोई हुनर भी होगा
Aapne dost lai jaan waarni eni mushkil nai
par mushkil ae ajehe dost nu labhna jis te jaan vaari jaa sake
ਅਾਪਣੇ ਦੋਸਤ ਲੲੀ ਜਾਨ ਵਾਰਨੀ ੲੇਨੀ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਨੲੀ..👬
ਪਰ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਅੈ ਅਜਿਹੇ ਦੋਸਤ ਨੂੰ ਲੱਭਣਾ 🤔 ਜਿਸ ਤੇ ਜਾਨ ਵਾਰੀ ਜਾ ਸਕੇ…🙂