अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे अपने चेहरे से जो ज़ाहिर है छुपायें कैसे तेरी मर्जी के मुताबिक नज़र आयें कैसे घर सजाने का तसव्वुर तो बहुत बाद का है पहले ये तय हो की इस घर को बचाएं कैसे क़हक़हा आँख का बर्ताव बदल देता है हंसने वाले तुझे आंसू नज़र आयें कैसे कोई अपनी ही नज़र से तो हमें देखेगा एक कतरे को समंदर नज़र आयें कैसे लाख तलवरे झुकी अती हो गरदन की तरफ सर झुकाना नहीं आता तो झुकाएं कैसे
मुक्कमल भले प्यार हमारा न हुआ……..
उनका हक जताना भी कयामत था भूल जाना भी कुबूल है वफा कर बेवफा कहलाना तो दुनिया का उसूल है
गलत साबित हुए हमेशा…………
उनका हमे आजमाना भी कयामत था ठुकराना भी कुबूल है वफा कर बेवफा कहलाना तो दुनिया का उसूल है
किताब के कहीं किसी पन्ने पर तो होंगे जरूर……..
उनका याद आना भी कयामत था भूल जाना भी कुबूल है वफा कर बेवफा कहलाना तो दुनिया का उसूल है