Likhne ko to hm kitaab bhi likh sakte the,
Har panne par tumhare alfaaz likh sakte the,
Magar khuda ko ye manzoor kahan tha,
Warna hm to apne khoon se tumhara naam likh sakte the.
@80rullah
Likhne ko to hm kitaab bhi likh sakte the,
Har panne par tumhare alfaaz likh sakte the,
Magar khuda ko ye manzoor kahan tha,
Warna hm to apne khoon se tumhara naam likh sakte the.
@80rullah
Ik palla jeha mooh te kreya c
Khaure ki soch muskaundi c..!!
Hath dua de vich c khade kitte
Anmulla kuch pauna chahundi c..!!
Din chdeya sunehre rang warga
Hath dil te Bs tikaya c..!!
Jo dekh k akhan nam hoyia
Ik sunpna jeha menu aaya c..!!
Eh do jahan de Malik ne
Kuj esa khel rachaya c..!!
Ohde dar te hoyi qubool meri
mohobbat nu gale lgaya c..!!
Oh fad ishqe da pallrha jeha
Ohde dar te sees niwaya c..!!
Mera hath fad ohde hathan vich
Jiwe aap khuda ne fadaya c..!!
Rooh khushi naal c jhum gayi
Rabb khud milawan aaya c..!!
Oh khayal c Pak mohobbat da
Jinne do roohan nu milaya c..!!
ਇੱਕ ਪੱਲਾ ਜਿਹਾ ਮੂੰਹ ਤੇ ਕਰਿਆ ਸੀ
ਖੌਰੇ ਕੀ ਸੋਚ ਮੁਸਕਾਉਂਦੀ ਸੀ.!!
ਹੱਥ ਦੁਆ ਦੇ ਵਿੱਚ ਸੀ ਖੜੇ ਕੀਤੇ
ਅਨਮੁੱਲਾ ਕੁਝ ਪਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੀ ਸੀ..!!
ਦਿਨ ਚੜ੍ਹਿਆ ਸੁਨਹਿਰੇ ਰੰਗ ਵਰਗਾ
ਹੱਥ ਦਿਲ ਤੇ ਬਸ ਟਿਕਾਇਆ ਸੀ..!!
ਜੋ ਦੇਖ ਕੇ ਅੱਖਾਂ ਨਮ ਹੋਈਆਂ
ਇੱਕ ਸੁਪਨਾ ਜਿਹਾ ਮੈਨੂੰ ਆਇਆ ਸੀ..!!
ਇਹ ਦੋ ਜਹਾਨ ਦੇ ਮਾਲਿਕ ਨੇ
ਕੁਝ ਐਸਾ ਖੇਲ ਰਚਾਇਆ ਸੀ..!!
ਓਹਦੇ ਦਰ ਤੇ ਹੋਈ ਕਬੂਲ ਮੇਰੀ
ਮੋਹੁੱਬਤ ਨੂੰ ਗਲੇ ਲਗਾਇਆ ਸੀ..!!
ਉਹ ਫੜ੍ਹ ਇਸ਼ਕੇ ਦਾ ਪੱਲੜਾ ਜਿਹਾ
ਓਹਦੇ ਦਰ ਤੇ ਸੀਸ ਨਿਵਾਇਆ ਸੀ..!!
ਮੇਰਾ ਹੱਥ ਫੜ੍ਹ ਓਹਦੇ ਹੱਥਾਂ ਵਿੱਚ
ਜਿਵੇਂ ਆਪ ਖੁਦਾ ਨੇ ਫੜਾਇਆ ਸੀ..!!
ਰੂਹ ਖੁਸ਼ੀ ਨਾਲ ਸੀ ਝੂਮ ਗਈ
ਰੱਬ ਖੁਦ ਮਿਲਾਵਨ ਆਇਆ ਸੀ..!!
ਉਹ ਖਿਆਲ ਸੀ ਪਾਕ ਮੋਹੁੱਬਤ ਦਾ
ਜਿੰਨੇ ਦੋ ਰੂਹਾਂ ਨੂੰ ਮਿਲਾਇਆ ਸੀ..!!
एक समय की बात है, बादशाह अकबर ने अपने बेगम के जन्मदिन के लिए बहुत ही खूबसूरत और बेशकीमती हार बनवाया था। जब जन्मदिन आया, तो बादशाह अकबर ने वह हार अपनी बेगम को तोहफे में दे दिया, जो उनकी बेगम को बहुत पसंद आया। अगली रात बेगम साहिबा ने वह हार गले से उतारकर एक संदूक में रख दिया। जब इस बात को कई दिन गुजर गए, तो एक दिन बेगम साहिबा ने हार पहने के लिए संदूक खोला, लेकिन हार कहीं नहीं मिला। इससे वह बहुत उदास हो गईं और इस बारे में बादशाह अकबर को बताया। इस बारे में पता चलते ही बादशाह अकबर ने अपने सैनिकों को हार ढूंढने का आदेश दिया, लेकिन हार कहीं नहीं मिला। इससे अकबर को यकीन हो गया कि बेगम का हार चोरी हो गया है।
फिर अकबर ने बीरबल को महल में आने के लिए बुलावा भेजा। जब बीरबल आया, तो अकबर ने सारी बात बताई और हार को खोज निकालने की जिम्मेदारी उसे सौंप दी। बीरबल ने समय व्यर्थ किए बिना ही राजमहल में काम करने वाले सभी लोगों को दरबार में आने के लिए संदेश भिजवाया। थोड़े ही देर में दरबार लग गया। दरबार में अकबर और बेगम सहित सभी काम करने वाले हाजिर थे, लेकिन बीरबल दरबार में नहीं था। सभी बीरबल का इंतजार कर ही रहे थे कि तभी बीरबल एक गधा लेकर राज दरबार में पहुंच जाता है। देर से दरबार में आने के लिए बीरबल बादशाह अकबर से माफी मांगता है। सभी सोचने लगते हैं कि बीरबल गधे को लेकर राज दरबार में क्यों आया है। फिर बीरबल बताता है कि यह गधा उसका दोस्त है और उसके पास जादुई शक्ति है। यह शाही हार चुराने वाले का नाम बता सकता है।
इसके बाद बीरबल जादुई गधे को सबसे नजदीक वाले कमरे में ले जाकर बांध देता है और कहता है कि सभी एक-एक करके कमरे में जाएं और गधे की पूंछ पकड़कर चिल्लाए “जहांपनाह मैंने चोरी नहीं की है।” साथ ही बीरबल कहता है कि आप सभी की आवाज दरबार तक आनी चाहिए। सभी के पूंछ पकड़कर चिल्लाने के बाद आखिर में गधा बताएगा कि चोरी किसने की है।
इसके बाद सभी कमरे के बाहर एक लाइन में खड़े हो गए और एक-एक करके सभी ने कमरे में जाना शुरू कर दिया। जो भी कमरे के अंदर जाता, तो पूंछ पकड़ कर चिल्लाना शुरू कर देता “जहांपनाह मैंने चोरी नहीं की है।” जब सभी का नंबर आ जाता है, तो अंत में बीरबल कमरे में जाता है और कुछ देर बाद कमरे से बाहर आ जाता है।
फिर बीरबल सभी काम करने वालों के पास जाकर उन्हें दोनों हाथ सामने करने को बोलता है और एक-एक करके सभी के हाथ सूंघने लगता है। बीरबल की इस हरकत को देखकर सभी हैरान हो जाते हैं। ऐसे ही सूंघते-सूंघते एक काम करने वाले का हाथ पकड़कर बीरबल जोर से बोलता है, “जहांपनाह इसने चोरी की है।” ये सुनकर अकबर बीरबल से कहते हैं, “तुम इतने यकीन के साथ कैसे कह सकते हो कि चोरी इस सेवक ने ही की है। क्या तुम्हें जादुई गधे ने इसका नाम बताया है।”
तब बीरबल बोलता है, “जहांपनाह यह गधा जादुई नहीं है। यह बाकी गधों की तरह साधारण ही है। बस मैंने इस गधे की पूंछ पर एक खास तरह का इत्र लगाया है। सभी सेवकों ने गधे की पूंछ को पकड़ा, बस इस चोर को छोड़कर। इसलिए, इसके हाथ से इत्र की खुशबू नहीं आ रही है।”
फिर चोर को पकड़ लिया गया और उससे चोरी के सभी सामान के साथ ही बेगम का हार भी बरामद कर लिया गया। बीरबल की इस अक्लमंदी की सभी ने सराहना की और बेगम ने खुश होकर बादशाह अकबर से उसे उपहार भी दिलवाया।