Likhne ko to hm kitaab bhi likh sakte the,
Har panne par tumhare alfaaz likh sakte the,
Magar khuda ko ye manzoor kahan tha,
Warna hm to apne khoon se tumhara naam likh sakte the.
@80rullah
Likhne ko to hm kitaab bhi likh sakte the,
Har panne par tumhare alfaaz likh sakte the,
Magar khuda ko ye manzoor kahan tha,
Warna hm to apne khoon se tumhara naam likh sakte the.
@80rullah
पहली धड़कन भी मेरी धडकी थी तेरे भीतर ही,
जमी को तेरी छोड़ कर बता फिर मैं जाऊं कहां.
आंखें खुली जब पहली दफा तेरा चेहरा ही दिखा,
जिंदगी का हर लम्हा जीना तुझसे ही सीखा.
खामोशी मेरी जुबान को सुर भी तूने ही दिया,
स्वेत पड़ी मेरी अभिलाषाओं को रंगों से तुमने भर दिया.
अपना निवाला छोड़कर मेरी खातिर तुमने भंडार भरे,
मैं भले नाकामयाब रही फिर भी मेरे होने का तुमने अहंकार भरा.
वह रात छिपकर जब तू अकेले में रोया करती थी,
दर्द होता था मुझे भी, सिसकियां मैंने भी सुनी थी.
ना समझ थी मैं इतनी खुद का भी मुझे इतना ध्यान नहीं था,
तू ही बस वो एक थी, जिसको मेरी भूख प्यार का पता था.
पहले जब मैं बेतहाशा धूल मैं खेला करती थी,
तेरी चूड़ियों तेरे पायल की आवाज से डर लगता था.
लगता था तू आएगी बहुत डाटेंगी और कान पकड़कर मुझे ले जाएगी,
माँ आज भी मुझे किसी दिन धूल धूल सा लगता है.
चूड़ियों के बीच तेरी गुस्से भरी आवाज सुनने का मन करता है,
मन करता है तू आ जाए बहुत डांटे और कान पकड़कर मुझे ले जाए.
जाना चाहती हूं उस बचपन में फिर से जहां तेरी गोद में सोया करती थी,
जब काम में हो कोई मेरे मन का तुम बात-बात पर रोया करती थी.
जब तेरे बिना लोरियों कहानियों यह पलके सोया नहीं करती थी,
माथे पर बिना तेरे स्पर्श के ये आंखें जगा नहीं करती थी.
अब और नहीं घिसने देना चाहती तेरे ही मुलायम हाथों को,
चाहती हूं पूरा करना तेरे सपनों में देखी हर बातों को.
खुश होगी माँ एक दिन तू भी,
जब लोग मुझे तेरी बेटी कहेंगे.
Dilla tere jan picho
Asi chhupke ronde😐 Aa roj
fikr ni me door chala jau
menu v tetho hun nafrat😒 h bahut
ebabta🤲 ch Asi ksr ni chhadi
pr hale tk sanu ni mili maut..🥱😪
ਦਿਲਾ ਤੇਰੇ ਜਾਨ ਪਿੱਛੋਂ
ਅਸੀ ਛੁਪਕੇ ਰੌਂਦੇ😭 ਆ ਰੋਜ
ਫਿਕਰ ਨੀ ਮੈ ਦੂਰ ਚਲਾ ਜਾਊ
ਮੈਨੂੰ ਵੀ ਤੈਥੋਂ ਹੁਣ ਨਫਰਤ ਹੈ ਬਹੁਤ
ਇਬਾਦਤਾਂ🤲 ‘ਚ ਅਸੀਂ ਕਸਰ ਨੀ ਛੱਡੀ
ਪਰ ਹੱਲੇ ਤੱਕ ਸਾਨੂੰ ਨੀ ਮਿਲੀ ਮੌਤ..😪