apni khusi doojeyaa cho na labheyaa karo
kaun kado chhad ke chalaa jaawe, koi pata nahi
ਆਪਣੀ ਖੁਸ਼ੀ ਦੂਜਿਆ ਚੋ ਨਾ ਲੱਭਿਆ ਕਰੋ,
ਕੋਣ ਕਦੋ ਛੱਡ ਕੇ ਚੱਲਾ ਜਾਵੇ,ਕੋਈ ਪਤਾ ਨਹੀ..
apni khusi doojeyaa cho na labheyaa karo
kaun kado chhad ke chalaa jaawe, koi pata nahi
ਆਪਣੀ ਖੁਸ਼ੀ ਦੂਜਿਆ ਚੋ ਨਾ ਲੱਭਿਆ ਕਰੋ,
ਕੋਣ ਕਦੋ ਛੱਡ ਕੇ ਚੱਲਾ ਜਾਵੇ,ਕੋਈ ਪਤਾ ਨਹੀ..

ना हुस्न से, ना सूरत से, ना तेरी अदाओं से दिल बेचैन है…
तेरे जिस्म का घायल करने वाला हिस्सा, तो सिर्फ़ तेरे नैन हैं..
देखा जो तूने, लगा लहरों पे चलती, ठंडी हवाओं का झोंका है..
क्या समझ इस इशारे में, कुछ था, या मेरी नजरों का धोखा है..
अब ना दिन में चैन है, ना रातों को सुकून मिलता है..
क्या तुझे लगता है, के किसी रांझे से मेरा खून मिलता है..??
अब तू ही सुलझा ये गुत्थी, जो मेरे ज़हन में चल रही है..
क्या ये आग ठीक है, प्यार की, जो मेरे सीने में जल रही है..?