मत ढूँढ़ो मुझे दुनिया की तन्हाई में
ठंड बहुत है मैं यही हूँ अपनी रज़ाई में।
Enjoy Every Movement of life!
मत ढूँढ़ो मुझे दुनिया की तन्हाई में
ठंड बहुत है मैं यही हूँ अपनी रज़ाई में।
डूबे हुओं को हमने बिठाया था अपनी कश्ती में यारो…..
और फिर कश्ती का बोझ कहकर, हमे ही उतारा गया
