मत ढूँढ़ो मुझे दुनिया की तन्हाई में
ठंड बहुत है मैं यही हूँ अपनी रज़ाई में।
Enjoy Every Movement of life!
मत ढूँढ़ो मुझे दुनिया की तन्हाई में
ठंड बहुत है मैं यही हूँ अपनी रज़ाई में।

हम आए थे इस रोज
जब तेरा निकाह था
तूने देखा नही शायद
में वही खड़ा था
पूछता तुझसे से मगर तू तो खुश थी
और वो आखरी दिन था जब मैं हसा था