कभी तो मेरी रूह को, कहीं ना कहीं जाकर सुकून मिलेगा..
फिर से जिंदगी को खुशियों से जीलूँ, ऐसा कोई जुनून मिलेगा..
ना जाने उस वक्त के इंतजार में कितने और लम्हे बिताने हैं..
चाह मैं जिसकी हाथों में लगा, मेरे अरमानों का खून मिलेगा..
कभी तो मेरी रूह को, कहीं ना कहीं जाकर सुकून मिलेगा..
फिर से जिंदगी को खुशियों से जीलूँ, ऐसा कोई जुनून मिलेगा..
ना जाने उस वक्त के इंतजार में कितने और लम्हे बिताने हैं..
चाह मैं जिसकी हाथों में लगा, मेरे अरमानों का खून मिलेगा..
मान लिखूँ सम्मान लिखूँ मैं।
आशय और बखान लिखूं मैं।
जिस नारी पर दुनिया आश्रित,
उसका ही बलिदान लिखूँ मैं।।
जीवन ऐसी बहती धारा,
जिसका प्यासा स्वयं किनारा,
पत्थर पत्थर अश्क उकेरे,
अधरों पर मुस्कान लिखूँ मैं।
मान——
कोमल है कमज़ोर नहीं है,
नारी है यह डोर नहीं है,
मनमर्ज़ी इसके संग करले
इतना कब आसान लिखूँ मैं
मान—-
बेटा हो या बेटी प्यारी,
जन्म सभी को देती नारी,
इसका अन्तस् पुलकित कोमल
इसके भी अरमान लिखूँ मैं
मान—-
हिम्मत से तक़दीर बदल दे,
मुस्कानों में पीर बदल दे,
प्रेम आस विश्वास की मूरत,
शब्द शब्द गुणगान लिखूँ मैं
मान——
Ab tum nahi mere saath tumahri yaade hai
pehle tumne rulaaeya ab baari tumaahri yaado ki hai
अब तुम नही मेरे साथ तुम्हारी यादें है
पहिले तुमने रूलाया अब बारी तुम्हारी यादों की है ।।