
samundar khali hi to hai
tujhe har pal yaad karna
meri bekhyali hi to hai
tha jha kehna wha keh na
paya umar bhar
kagjo par yun shayari
likhna ki bejubani hi to hai

जो दर्द छुपा था सहमी सी आँखों में उसकी, वक़्त लगा पर दिख गया..
उसे भी शायद कोई गम था ऐसा, जो बेरहम इस जमाने से झिक गया..
आँखें मूंदी कई बार तो उसने, शायद गम को कहीं वो छुपा सके..
मगर हर आंसू जो उसकी आंखों से बहा, अपने हर दर्द की दास्तां लिख गया..
Tu nadi hai to alag apna, rasta rakhna
Na kisi raah ke pathar se vasta rakhna
Paas jayegi to khud usmein doob jayegi
Agar mile bhi samndar, to fasla rakhna💯
तू नदी है तो अलग अपना, रास्ता रखना
न किसी राह के, पत्थर से वास्ता रखना
पास जाएगी तो खुद, उसमें डूब जाएगी
अगर मिले भी समन्दर, तो फासला रखना💯