Aye dost hum ne tark-e-mohabbat ke bawjood,
Mehsoos ki hai teri zaroorat kabhi kabhi..
Aye dost hum ne tark-e-mohabbat ke bawjood,
Mehsoos ki hai teri zaroorat kabhi kabhi..
Supne taan bahut ne
Prr tere nall hi pure krange
Je tu na mili taan
Jee ke asi vi ki krange
हर वक्त एक अंजान साया सा, मेरे पास घूमता रहता है..
मेरे दिल से जुडा है वो शायद, मेरी रूह चूमता रहता है..
बताता नहीं है मुझको कुछ, और ना मुझसे कुछ कहता है..
मेरी मर्जी हो या ना हो मगर, शागिर्द बना वो रहता है..
दिन और रात वो बस मेरे, आगोश में पलता रहता है..
मैं चाहुं या फिर ना चाहुं, मेरे साथ वो चलता रहता है..
हर खुशी बांटता है मेरी, हर गम मेरे संग सेहता है..
आखिर साया है ये किसका, ये सवाल जहन में रहता है..