बात 🤔दिन की🤪 नहीं अब ❌रात से ड़र 😬लगता है😨😨
घर 🏠है कच्चा बरसात🌨️ से ड़र लगता 😨है,
प्यार को ❤️छोड़कर तुम कोई 🤔और बात कर👍 लो🤩🤩🤩
अब मुझे 😁प्यार की❤️ हर बात से ड़र 😨लगता है
बात 🤔दिन की🤪 नहीं अब ❌रात से ड़र 😬लगता है😨😨
घर 🏠है कच्चा बरसात🌨️ से ड़र लगता 😨है,
प्यार को ❤️छोड़कर तुम कोई 🤔और बात कर👍 लो🤩🤩🤩
अब मुझे 😁प्यार की❤️ हर बात से ड़र 😨लगता है
माना तुम्हे हर बार देखता हूं,
हर बार पहली बार देखता हूं,
देखता हूं तुम्हे जब जुल्फें संवरती हो तुम,
उन जुल्फों को आइना बनके हर बार देखता हूं,
आंखो में रातें और सुर्खी में ग़ुलाब जैसे,
मेरे हाथ खाली जाम तुम्हारे होंठो में शराब जैसे,
जैसे हर बार तुम्हारा वो ख़्वाब देखता हूं,
तुम्हारे हाथों में मेरा दिया वो ग़ुलाब देखता हूं,
वक्त हो तो आना कभी इक हसरत बाकी है,
तुम्हे हर बार की तरह पहली बार देखना बाकी है...
मैं ना जानू दोस्त तेरे दूर हो जाने के बाद,
यह जिंदगी कैसे जंग बन गई है।
मैं ना जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
यह गांव की गलियां कैसे सुनी हो गई है।
मैंने जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
वो खेल का मैदान अब सुना लगता है।
मैं ना जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
कैसे फूल जैसी जिंदगी पत्थर बन गई है।
खुद को मनाने की कोशिश करता हूं बहुत,
लेकिन क्या करूं दिल है कि मानता ही नहीं।
मैं ना जानू दोस्त तेरी दूर हो जाने के बाद,
मेरे चेहरे की हंसी कहां गुम हो गई।
मैं ना जानू दोस्त तेरे जाने के बाद,
बाजारों की रौनक भी फीकी लगती है।
तू कब आएगा मेरे भाई मेरे दोस्त,
तेरे को हर दिन गले लगाने का मन करता है।