Apni tamanna se kbhi kuch nahi chaha tha humne,
uss ki khushi dhundhte rhe toh badnaam ho gaye..!
Apni tamanna se kbhi kuch nahi chaha tha humne,
uss ki khushi dhundhte rhe toh badnaam ho gaye..!
Vo roye to bhut par mujhse mooh mod kar roye
Koi majboori hogi jo dil tod kar roye
Mere samne kar diye…Meri tasveer ke tukde
Pta chala mere piche vo unhe jod kar roye
वो रोए तो बहुत पर मुझसे मुंह मोड़ कर रोए,
कोई मजबूरी होगी जो दिल तोड़ कर रोए,
मेरे सामने कर दिए… मेरी तस्वीर के टुकड़े,
पता चला मेरे पीछे वो उन्हे जोड़ कर रोए।
जाते जाते एक उम्दा तालीम दे गया, वो मुसाफिर, खुदकी तलाश में घर से निकल गया, वो मुसाफिर, सोचा साथ जाऊं मैं भी, पर जाऊंगा कहां, जा चुका होगा मीलों दूर, उसे पाऊंगा कहां, इसी सोच में रात हुई, नींद का झोंका आ गया, सुबह आंखे खुली तो सोचा, क्या वो मौका आज आ गया ? के चला जाऊं सबसे इतना दूर के कुछ ना हो, गहरी नींद में बेड़ियां मिले पर सचमुच ना हो, सच हो तो बस आसमां में परिंदो सी उड़ान हो, चाहूंगा हर सितमगर का बड़ा सा मकान हो, वहां आवाज़ देकर झोली फैलाएगा वो मुसाफिर, तुम्हे देख भीगी पलकें उठाएगा वो मुसाफिर, मोहब्बत से एक रोटी खिलाकर देखना तुम, शोहरत से दामन भर जाएगा वो मुसाफिर...