बहुत गहरे जख्म हैं हमारे,
अपने जख्मों पर हम रोज मरहम लगाते हैं,
अंदर से टूट गए हैं हम पूरी तरह,
लोगों को अपना हाल अच्छा बताते हैं।
बहुत गहरे जख्म हैं हमारे,
अपने जख्मों पर हम रोज मरहम लगाते हैं,
अंदर से टूट गए हैं हम पूरी तरह,
लोगों को अपना हाल अच्छा बताते हैं।
हमारे बिन तुम अधूरे ही रहोगे,
किसी ने चाहा शिद्दत से ऐसा तुम खुद कहोगे,
हम न होंगे मौजूद तो ये आलम भी कहेगा,
मिलेंगे तुझको बहुत पर हम जैसा पागल कोई ओर
किसी न किसी पे किसी को ऐतबार हो जाता है ,
अजनबी कोई शख्स यार हो जाता है ,
खूबियों से नहीं होती मोहब्बत सदा ,
खामियों से भी अक्सर प्यार हो जाता है 🥀
किन लफ़्ज़ों में इतनी कड़वी कसैली बात लिखूं ,
मैं सच लिखूं के अपने हालत लिखूं ,
कैसे लिखूं मैं चांदनी रातें ,
जब गरम हो रेत तो कैसे मैं बरसात लिखूं .✨
सभी नग्मे साज़ में गाये नहीं जाते ,
सभी लोग महफ़िल में बुलाये नहीं जाते ,
कुछ पास रह कर भी याद नहीं आते ,
कुछ दूर रह कर भी भूलाये नहीं जाते!❤️