बहुत गहरे जख्म हैं हमारे,
अपने जख्मों पर हम रोज मरहम लगाते हैं,
अंदर से टूट गए हैं हम पूरी तरह,
लोगों को अपना हाल अच्छा बताते हैं।
बहुत गहरे जख्म हैं हमारे,
अपने जख्मों पर हम रोज मरहम लगाते हैं,
अंदर से टूट गए हैं हम पूरी तरह,
लोगों को अपना हाल अच्छा बताते हैं।
Khayalat badalne lage hain jinme
Mehaz un rangon mein dhal rahi hai..!!
Ishq hone laga hai dard se bhi
Kuch zindagi esi chal rahi hai..!!
ख़यालात बदलने लगे हैं जिनमे
महज़ उन रंगों में ढल रही है..!!
इश्क होने लगा है दर्द से भी
कुछ ज़िन्दगी ऐसी चल रही है..!!
तिश्नगी थी मुलाक़ात की,
उस से हाँ मैंने फिर बात की।
दुश्मनी मेरी अब मौत से,
ज़िंदगी हाथ पे हाथ की।
सादगी उसकी देखा हूँ मैं,
हाँ वो लड़की है देहात की।
तुमने वादा किया था कभी,
याद है बात वो रात की।
अब मैं कैसे कहूँ इश्क़ इसे,
बात जब आ गई ज़ात की।
मुझसे क्या दुश्मनी ऐ घटा,
क्यों मेरे घर पे बरसात की।
हमको मालिक ने जितना दिया,
सब ग़रीबों में ख़ैरात की।
तू कभी मिल तो मालूम हो,
क्या है औक़ात औक़ात की।