Eh oh zamaana hai, jisdi jinni parwaah karoge..
Oh onaa hi beparwaah ho ke nikalega
ਇਹ ਉਹ ਜ਼ਮਾਨਾ ਹੈ, ਜਿਸਦੀ ਜਿਨ੍ਹੀ ਪਰਵਾਹ ਕਰੋਗੇ…
ਉਹ ਉਨ੍ਹਾਂ ਹੀ ਬੇਪਰਵਾਹ ਹੋ ਕੇ ਨਿਕਲੇਗਾ !
Eh oh zamaana hai, jisdi jinni parwaah karoge..
Oh onaa hi beparwaah ho ke nikalega
ਇਹ ਉਹ ਜ਼ਮਾਨਾ ਹੈ, ਜਿਸਦੀ ਜਿਨ੍ਹੀ ਪਰਵਾਹ ਕਰੋਗੇ…
ਉਹ ਉਨ੍ਹਾਂ ਹੀ ਬੇਪਰਵਾਹ ਹੋ ਕੇ ਨਿਕਲੇਗਾ !
सरगोशियां हवाओ की सुनी जो कानो ने।
गुफ्तगू तेरी सुनी थी खामोश अफसानो ने।
मुस्कराना तेरा तो,एक दिलनशीं अदा थी।
ज़रा सुन भी लेते कहा क्या है ,दीवानो ने।
वो लचक जाना ,तेरी कमर का चलते चलते।
खुली लूट मची थी मनचलों के ख़जानो मे..
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…