
Beshak me peenda aa bhawe e bhaerri sharaab
par teriyaan yaadan nu mitaon lai nahi
uhnu nu hor nikharan lai

Beshak me peenda aa bhawe e bhaerri sharaab
par teriyaan yaadan nu mitaon lai nahi
uhnu nu hor nikharan lai
तिश्नगी थी मुलाक़ात की,
उस से हाँ मैंने फिर बात की।
दुश्मनी मेरी अब मौत से,
ज़िंदगी हाथ पे हाथ की।
सादगी उसकी देखा हूँ मैं,
हाँ वो लड़की है देहात की।
तुमने वादा किया था कभी,
याद है बात वो रात की।
अब मैं कैसे कहूँ इश्क़ इसे,
बात जब आ गई ज़ात की।
मुझसे क्या दुश्मनी ऐ घटा,
क्यों मेरे घर पे बरसात की।
हमको मालिक ने जितना दिया,
सब ग़रीबों में ख़ैरात की।
तू कभी मिल तो मालूम हो,
क्या है औक़ात औक़ात की।
Menu v ni pta menu os din chaa kinna chdya c
Menu ajj v oh din bhulda nahi jado hath mera tu fadya c….