जय भारतीय किसान
तुमने कभी नहीं किया विश्राम
हर दिन तुमने किया है काम
सेहत पर अपने दो तुम ध्यान
जय भारतीय किसान.
अपना मेहनत लगा के
रूखी सूखी रोटी खा के
उगा रहे हो तुम अब धान
जय भारतीय किसान.
तरुण चौधरी
जय भारतीय किसान
तुमने कभी नहीं किया विश्राम
हर दिन तुमने किया है काम
सेहत पर अपने दो तुम ध्यान
जय भारतीय किसान.
अपना मेहनत लगा के
रूखी सूखी रोटी खा के
उगा रहे हो तुम अब धान
जय भारतीय किसान.
तरुण चौधरी
तेरी हंसी मुरझाऐ फुलों को भी फिर से खिला दे,
जब झपकाऐ तु पलकें तो ,सुरज को भी ग्रहण लगा दे,
चाल तेरी ऐसी जैसे लहराती हो पीपल की डाल कोई,
और जब खुली हों तेरी जुल्फें तो काली घटा झा जाऐ!
बोल तेरे ऐसे जैसे जलेबी से चासनी टपक जाऐ,
क्या लिखुं तेरी खुबसुरती को तु है गणित का सवाल कोई!
इश्क़ मुकम्मल नहीं हुआ तो क्या हुआ
अधूरी ख़्वाहिशें मेरे दिल में ज़िंदा तो हैं
क्या हुआ जो आधा अधूरा मैं रह गया
उससे मेरी शायरी और गज़लें पूरी तो हैं