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Bheegi bheegi raat main

Bheegi bheegi raat main tujhse milna acha lagta hai

Haathon main haath leke Milo dur saath chalna acha lagta hai

Tere saath pyaar ke haseen pal gujarna acha lagta hai

Kuch naa kehke bhi sab kuch kehna mujhe acha lagta hai

Ankho main ankhe bhar ke ek duje ko mehsoos karna acha lagta hai

Iss berang zindagi main khushiyon ke pal bharna dil ko sukoon de jaata hai

Saare gam ko bhula deta hai

Aankho se nami Mita deta hai

Aur Tera paas hona saari Kami Mita deta hai

Title: Bheegi bheegi raat main

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


Khud se baat… || kavita

Mann aur meri baatein…(Auron ki baat kya, tum khud k bhi sage nhi.)

Fursat mile kabhi toh mujhse bhi Milo…

Begairat khwabon ko chhod meri bhi sun lo…

Auron ki sun sun k ubb se gye ho…

Gairon se lad lad k akhir thak bhi gye ho……

Khud k kyalon व sawalon se dar gye ho…

Kya khoya kya paya k hisaabon se jo bhar gye ho…

Toh kabhi mujh se bhi mil lo…

Ek baar hi sahi par meri bhi sun lo…

Maana ki bhaagna fitrat h tumhari…

Banaye Jo rishte, adhoori reh gyi saari

Auron ki khatir ..taumra jo guzari…

Shayad ab utri h sir se zamane ki khumari…

Toh kahi Kone me ek jagah chun lo…

Kya keh raha main…usse bhi sun lo…

Toh kya hua jo tm bhaagte hi reh gye

Banaye rishte adhure hi reh gye…

Kya na bhaagna wala bhi ek jagah ruk paya h…

Marne se pehle koi pura kaha ho Paya h…

Chhod sb mere raaste ko chun lo….

Kabhi fursat mile toh meri bhi sun lo…

Title: Khud se baat… || kavita


कवि और धनवान आदमी : अकबर-बीरबल की कहानी

एक दिन एक कवि किसी धनी आदमी से मिलने गया और उसे कई सुंदर कविताएं इस उम्मीद के साथ सुनाईं कि शायद वह धनवान खुश होकर कुछ ईनाम जरूर देगा। लेकिन वह धनवान भी महाकंजूस था, बोला, “तुम्हारी कविताएं सुनकर दिल खुश हो गया। तुम कल फिर आना, मैं तुम्हें खुश कर दूंगा।”

‘कल शायद अच्छा ईनाम मिलेगा।’ ऐसी कल्पना करता हुआ वह कवि घर पहुंचा और सो गया। अगले दिन वह फिर उस धनवान की हवेली में जा पहुंचा। धनवान बोला, “सुनो कवि महाशय, जैसे तुमने मुझे अपनी कविताएं सुनाकर खुश किया था, उसी तरह मैं भी तुमको बुलाकर खुश हूं। तुमने मुझे कल कुछ भी नहीं दिया, इसलिए मैं भी कुछ नहीं दे रहा, हिसाब बराबर हो गया।”

कवि बेहद निराश हो गया। उसने अपनी आप बीती एक मित्र को कह सुनाई और उस मित्र ने बीरबल को बता दिया। सुनकर बीरबल बोला, “अब जैसा मैं कहता हूं, वैसा करो। तुम उस धनवान से मित्रता करके उसे खाने पर अपने घर बुलाओ। हां, अपने कवि मित्र को भी बुलाना मत भूलना। मैं तो खैर वहां मैंजूद रहूंगा ही।”

कुछ दिनों बाद बीरबल की योजनानुसार कवि के मित्र के घर दोपहर को भोज का कार्यक्रम तय हो गया। नियत समय पर वह धनवान भी आ पहुंचा। उस समय बीरबल, कवि और कुछ अन्य मित्र बातचीत में मशगूल थे। समय गुजरता जा रहा था लेकिन खाने-पीने का कहीं कोई नामोनिशान न था। वे लोग पहले की तरह बातचीत में व्यस्त थे। धनवान की बेचैनी बढ़ती जा रही थी, जब उससे रहा न गया तो बोल ही पड़ा, “भोजन का समय तो कब का हो चुका ? क्या हम यहां खाने पर नहीं आए हैं ?”

“खाना, कैसा खाना ?” बीरबल ने पूछा।

धनवान को अब गुस्सा आ गया, “क्या मतलब है तुम्हारा ? क्या तुमने मुझे यहां खाने पर नहीं बुलाया है ?”

खाने का कोई निमंत्रण नहीं था। यह तो आपको खुश करने के लिए खाने पर आने को कहा गया था।” जवाब बीरबल ने दिया। धनवान का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया, क्रोधित स्वर में बोला, “यह सब क्या है? इस तरह किसी इज्जतदार आदमी को बेइज्जत करना ठीक है क्या ? तुमने मुझसे धोखा किया है।”

अब बीरबल हंसता हुआ बोला, “यदि मैं कहूं कि इसमें कुछ भी गलत नहीं तो…। तुमने इस कवि से यही कहकर धोखा किया था ना कि कल आना, सो मैंने भी कुछ ऐसा ही किया। तुम जैसे लोगों के साथ ऐसा ही व्यवहार होना चाहिए।”

धनवान को अब अपनी गलती का आभास हुआ और उसने कवि को अच्छा ईनाम देकर वहां से विदा ली।

वहां मौजूद सभी बीरबल को प्रशंसा भरी नजरों से देखने लगे।

Title: कवि और धनवान आदमी : अकबर-बीरबल की कहानी