शर्माकर एक दिन इन्हीं आँखों ने, मेरे प्यार को कुबूला था..
इन्हीं पलकों के साए में रह कर कभी, पिछले गमों को भुला था..
उनका इश्क, नफ़रत में कब बदला, हमें ख़बर भी ना लगी..
उनके ज़हन से मेरा नाम ऐसे मिटा जैसे, परदेसी कोई सारे गांव को भूला था..
शर्माकर एक दिन इन्हीं आँखों ने, मेरे प्यार को कुबूला था..
इन्हीं पलकों के साए में रह कर कभी, पिछले गमों को भुला था..
उनका इश्क, नफ़रत में कब बदला, हमें ख़बर भी ना लगी..
उनके ज़हन से मेरा नाम ऐसे मिटा जैसे, परदेसी कोई सारे गांव को भूला था..

Ishq mein aajmayish nhi chalti
Jaha maang kar khana ho waha farmaish nhi chalti
Batane aur sunne mein fark hota hai
Har jgah hmari tumhari khwahish nhi chalti 🙌
ईश्क में आजमाइस नहीं चलती
जहा मांग के खाना हो वहा फरमाइश नही चलती
बताने और सुनाने में फर्क होता है
हर जगह हमारी तुम्हारी ख्वाईस नही चलती🙌