Bhulekha na khai kise di soorat dekh ke
aksar vishvaas bna ke lok bahut dhoongi satt marde neਭੁਲੇਖਾ ਨਾ ਖਾਈ ਕਿਸੇ ਦੀ ਸੂਰਤ ਦੇਖ ਕੇ
ਅਕਸਰ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਬਣਾ ਕੇ ਲੋਕ ਬਹੁਤ ਡੂੰਗੀ ਸੱਟ ਮਾਰਦੇ ਨੇ.. ॥
Bhulekha na khai kise di soorat dekh ke
aksar vishvaas bna ke lok bahut dhoongi satt marde neਭੁਲੇਖਾ ਨਾ ਖਾਈ ਕਿਸੇ ਦੀ ਸੂਰਤ ਦੇਖ ਕੇ
ਅਕਸਰ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਬਣਾ ਕੇ ਲੋਕ ਬਹੁਤ ਡੂੰਗੀ ਸੱਟ ਮਾਰਦੇ ਨੇ.. ॥
ज़िन्दगी सीधे साधे चलना ठीक नही
उबड़ खाबड़ पड़ाव भी जरूरी है,
तैरते तैरते बाजू थक जाएंगे
एक पल के लिए नाव भी जरूरी है,
बदलाव भी जरूरी
ये घाव भी जरूरी है,
इतनी धूप अच्छी नेही
थोड़ी छांव भी जरूरी है..!
हद-ए-शहर से निकली तो,
गांव-गांव चली..
कुछ यादें मेरे संग,
पांव-पांव चली..!
सफर जो धूप का किया तो,
तजुर्बा हुआ..
वो ज़िन्दगी ही क्या जो,
छांव-छांव चली..!!