Bhulekha na khai kise di soorat dekh ke
aksar vishvaas bna ke lok bahut dhoongi satt marde neਭੁਲੇਖਾ ਨਾ ਖਾਈ ਕਿਸੇ ਦੀ ਸੂਰਤ ਦੇਖ ਕੇ
ਅਕਸਰ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਬਣਾ ਕੇ ਲੋਕ ਬਹੁਤ ਡੂੰਗੀ ਸੱਟ ਮਾਰਦੇ ਨੇ.. ॥
Bhulekha na khai kise di soorat dekh ke
aksar vishvaas bna ke lok bahut dhoongi satt marde neਭੁਲੇਖਾ ਨਾ ਖਾਈ ਕਿਸੇ ਦੀ ਸੂਰਤ ਦੇਖ ਕੇ
ਅਕਸਰ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਬਣਾ ਕੇ ਲੋਕ ਬਹੁਤ ਡੂੰਗੀ ਸੱਟ ਮਾਰਦੇ ਨੇ.. ॥
“सोचता हूँ, के कमी रह गई शायद कुछ या
जितना था वो काफी ना था,
नहीं समझ पाया तो समझा दिया होता
या जितना समझ पाया वो काफी ना था,
शिकायत थी तुम्हारी के तुम जताते नहीं
प्यार है तो कभी जमाने को बताते क्यों नहीं,
अरे मुह्हबत की क्या मैं नुमाईश करता
मेरे आँखों में जितना तुम्हें नजर आया,
क्या वो काफी नहीं था I
सोचता हूँ के क्या कमी रह गई,
क्या जितना था वो काफी नहीं था
“सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
उनके मुँह से निकले सारे अल्फाजों को याद कर लूँ कभी I
ऐसी क्या मज़बूरी होगी उनकी की हम याद नहीं आते I
सोचता हूँ तोहफा भेज कर अपनी याद दिला दूँ कभी I
सोचता हूँ कभी पन्नों पर उतार लूँ उन्हें I
Ustada inch v ni koi pair patda
je rolla howe PLB wale jatt da..🥱💯
ਉਸ੍ਤਾਦਾ ਇੰਚ ਵੀ ਨੀ ਕੋਈ ਪੈਰ ਪਟਦਾ
ਜੇ ਰੋਲਾ ਹੋਵੇ ਪਿਲੀਬੰਗਾ ਵਾਲੇ ਜਾਟ ਦਾ…🥱💯
~~~~ Plbwala®️✓✓✓✓