यादों की गलियों में मिलता है
तोड़ा हुआ दिल, टूटे हुए प्यार के टुकड़े, बिखरे हुए आशिक़ मिल।
बीते हुए लम्हों की मुस्कान बेताबी से चीरती है, प्यार की कहानी के सिलसिले को यादें उधार छीरती है।”
यादों की गलियों में मिलता है
तोड़ा हुआ दिल, टूटे हुए प्यार के टुकड़े, बिखरे हुए आशिक़ मिल।
बीते हुए लम्हों की मुस्कान बेताबी से चीरती है, प्यार की कहानी के सिलसिले को यादें उधार छीरती है।”

गिरा तो फ़िर कभी,उठा ना मिला
बंदों का हुज़ूम था,खुदा ना मिला
ज़िस्म ना मिले,तो क्या हुआ यार
वो दिल से कभी, जुदा ना मिला
परिंदों के जैसा था, इश्क़ उसका
कोई वादा, कोई वास्ता ना मिला
ऐसे हुआ दिल पर,कब्ज़ा उसका
धड़कनों को भी, रास्ता ना मिला
उसके शाहपरस्त भी हैं,बादशाह
कोई भी पत्थर,तरास्ता ना मिला