Likh likh ke benaam hoe
bulaa to haase gumnaam hoye
ਲਿਖ ਲਿਖ ਕੇ ਬੇਨਾਮ ਹੋਏ
ਬੁੱਲਿਆ ਤੋਂ ਹਾਸੇ ਗੁਮਨਾਮ ਹੋਏ
Likh likh ke benaam hoe
bulaa to haase gumnaam hoye
ਲਿਖ ਲਿਖ ਕੇ ਬੇਨਾਮ ਹੋਏ
ਬੁੱਲਿਆ ਤੋਂ ਹਾਸੇ ਗੁਮਨਾਮ ਹੋਏ
कल एक झलक ज़िंदगी को देखा,
वो राहों पे मेरी गुनगुना रही थी,
फिर ढूँढा उसे इधर उधर
वो आँख मिचौली कर मुस्कुरा रही थी,
एक अरसे के बाद आया मुझे क़रार,
वो सहला के मुझे सुला रही थी
हम दोनों क्यूँ ख़फ़ा हैं एक दूसरे से
मैं उसे और वो मुझे समझा रही थी,
मैंने पूछ लिया- क्यों इतना दर्द दिया
कमबख्त तूने,
वो हँसी और बोली- मैं जिंदगी हूँ पगले
तुझे जीना सिखा रही थी।
Bina kiteyan gunahan di mili jiwe saza
Udaas e man par pta nhio vajah..!!
ਬਿਨਾਂ ਕੀਤਿਆਂ ਗੁਨਾਹਾਂ ਦੀ ਮਿਲੀ ਜਿਵੇਂ ਸਜ਼ਾ
ਉਦਾਸ ਏ ਮਨ ਪਰ ਪਤਾ ਨਹੀਂਓ ਵਜ੍ਹਾ..!!