Kol aawi na aawi bas rooh nu jachda rahi
Dil vich vassda rahi te bullan te hassda rahi..!!
ਕੋਲ ਆਵੀਂ ਨਾ ਆਵੀਂ ਬੱਸ ਰੂਹ ਨੂੰ ਜੱਚਦਾ ਰਹੀਂ
ਦਿਲ ਵਿੱਚ ਵੱਸਦਾ ਰਹੀਂ ਤੇ ਬੁੱਲ੍ਹਾਂ ‘ਤੇ ਹੱਸਦਾ ਰਹੀਂ..!!
Kol aawi na aawi bas rooh nu jachda rahi
Dil vich vassda rahi te bullan te hassda rahi..!!
ਕੋਲ ਆਵੀਂ ਨਾ ਆਵੀਂ ਬੱਸ ਰੂਹ ਨੂੰ ਜੱਚਦਾ ਰਹੀਂ
ਦਿਲ ਵਿੱਚ ਵੱਸਦਾ ਰਹੀਂ ਤੇ ਬੁੱਲ੍ਹਾਂ ‘ਤੇ ਹੱਸਦਾ ਰਹੀਂ..!!
बादशाह अकबर की यह आदत थी कि वह अपने दरबारियों से तरह-तरह के प्रश्न किया करते थे। एक दिन बादशाह ने दरबारियों से प्रश्न किया, “अगर सबकी दाढी में आग लग जाए, जिसमें मैं भी शामिल हूं तो पहले आप किसकी दाढी की आग बुझायेंगे?”
“हुजूर की दाढी की” सभी सभासद एक साथ बोल पड़े।
मगर बीरबल ने कहा – “हुजूर, सबसे पहले मैं अपनी दाढी की आग बुझाऊंगा, फिर किसी और की दाढी की ओर देखूंगा।”
बीरबल के उत्तर से बादशाह बहुत खुश हुए और बोले- “मुझे खुश करने के उद्देश्य से आप सब लोग झूठ बोल रहे थे। सच बात तो यह है कि हर आदमी पहले अपने बारे में सोचता है।”
Dil dolat hai teri jadon marzi karach lawi
eh jaan gareeban di jithe marji varat lawi
ਦਿਲ ਦੌਲਤ ਹੈ ਤੇਰੀ ਜਦੋਂ ਮਰਜੀਂ ਖਰਚ ਲਵੀ ,
ਇਹ ਜਾਨ ਗਰੀਬਾਂ ਦੀ ਜਿੱਥੇ ਮਰਜੀਂ ਵਰਤ ਲਵੀਂ.