चाहत के सिलसिले हुए ना कम,
मिलते रहे फेश टू फेश,
सपने में भी मिलना ना हुआ कम।
चाहत के सिलसिले हुए ना कम,
मिलते रहे फेश टू फेश,
सपने में भी मिलना ना हुआ कम।
julphon ko phaila kar jab koee mahabooba kisee aashik kee kabr par rotee hai,
tab mahasoos hota hai ki maut bhee kitanee haseen hotee he…
जुल्फों को फैला कर जब कोई महबूबा किसी आशिक की कब्र पर रोती है,
तब महसूस होता है कि मौत भी कितनी हसीं होती हे…..
किसान कविता
बूँद बूँद को तरसे जीवन,
बूँद से तड़पा हर किसान
बूँद नही हैं कही यहाँ पर
गद्दी चढ़े बैठे हैवान.
बूँद मिली तो हो वरदान
बूँद से तरसा हैं किसान
बूँद नही तो इस बादल में
देश का डूबा है अभिमान
बूँद से प्यासा हर किसान
बूँद सरकारों का फरमान
बूँद की राजनीति पर देखों
डूब रहा है हर इंसान.
देव चौधरी