Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status
Jit gaye oh || sad shayari punjabi
ਜਿਤ ਗਿਆ ਔਹ ਅਸੀਂ ਹਾਰ ਗਏ
ਇਸ਼ਕ ਦੇ ਨਾਂ ਤੇ ਸਾਨੂੰ ਔਹ ਮਾਰ ਗਏ
ਗਲ਼ੇ ਮਿਲ਼ਦਾ ਤੇ ਜਾਨ ਸਾਨੂੰ ਕਹਿੰਦਾ ਸੀ
ਐਹ ਗਲਾਂ ਮਿਠਿਆ ਦੇ ਹੋ ਕਿਨੇਂ ਸ਼ਿਕਾਰ ਗਏ
ਬਾਲਾਂ ਦਿਮਾਗ ਦਾ ਤੇ ਬਾਲਾਂ ਸਿਆਣਾਂ ਸੀ
ਐਹ ਦਿਮਾਗ ਵਾਲੇਆਂ ਕਰਕੇ ਪਿਠ ਤੇ ਹੋ ਵਾਰ ਗਏ
ਹੁਣ ਇਸ਼ਕ ਦਾ ਨਾਂ ਵੀ ਨਹੀਂ ਲੇਣਾ ਹੋ ਜਿਦੇ ਕਰਕੇ ਬਰਬਾਦ ਗਏ
ਚਲ ਹੁਣ ਛੱਡ ਆਪਣਾ ਤੇ ਕੀ ਪਰਾਇਆਂ
ਕਮੀ ਕਿਸੇ ਨੇ ਵੀ ਕੋਈ ਵੀ ਨਹੀਂ ਛੱਡੀ
ਅਸੀਂ ਓਹਣਾ ਵਿਚੋਂ ਨਹੀਂ ਹਾਂ ਜੋ ਪਿਆਰ ਪਾਵੇਂ ਗਲਾਂ ਕਰਕੇ ਵੱਡੀ
ਆਏ ਇਸ਼ਕ ਦੀ ਸੋਹਾ ਖਾਂ ਕੇ ਹੋ ਛੇਤੀ ਉਡਾਰ ਗਏ
ਜਿਤ ਗਿਆ ਔਹ ਅਸੀਂ ਉਤੋਂ ਹਾਰ ਗਏ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
Title: Jit gaye oh || sad shayari punjabi
Hindi kavita || बहती नदी – सी || hindi poetry
थी मै,शांत चित्त बहती नदी – सी
तलहटी में था कुछ जमा हुआ
कुछ बर्फ – सा ,कुछ पत्थर – सा।
शायद कुछ मरा हुआ..
कुछ अधमरा सा।
छोड़ दिया था मैंने
हर आशा व निराशा।
होंठो में मुस्कान लिए
जीवन के जंग में उलझी
कभी सुलगी,कभी सुलझी..
बस बहना सीख लिया था मैंने।
जो लगी थी चोट कभी
जो टूटा था हृदय कभी
उन दरारों को सबसे छुपा लिया था
कर्तव्यों की आड़ में।
फिर एक दिन..
हवा के झोंके के संग
ना जाने कहीं से आया
एक मनभावन चंचल तितली
था वो जरा प्यासा सा
मनमोहक प्यारा सा।
खुशबूओं और पुष्पों
की दुनिया छोड़
सारी असमानताओं और
बंधनों को तोड़
सहमी – बहती नदी को
खुलकर बहना सीखा गया,
अपने प्रेम की गरमी से
बर्फ क्या पत्थर भी पिघला गया।
पाकर विश्वास कोमल भावों से जोड़े नाते का
सारी दबी अपेक्षाएं हो गई फिर जीवंत
लेकिन क्या पता था –
होगा इसका भी एक दिन अंत !
तितली को आयी अपनों की याद
फिर एक दिन..
हवा के झोंके के संग
ना जाने कहीं से आया
एक मनभावन चंचल तितली
था वो जरा प्यासा सा
मनमोहक प्यारा सा।
खुशबूओं और पुष्पों
की दुनिया छोड़
सारी असमानताओं और
बंधनों को तोड़
सहमी – बहती नदी को
खुलकर बहना सीखा गया,
अपने प्रेम की गरमी से
बर्फ क्या पत्थर भी पिघला गया।
पाकर विश्वास कोमल भावों से जोड़े नाते का
सारी दबी अपेक्षाएं हो गई फिर जीवंत
लेकिन क्या पता था –
होगा इसका भी एक दिन अंत !
तितली को आयी अपनों की याद
मुड़ चला बगिया की ओर
सह ना सकी ये देख नदी
ये बिछड़न ये एकाकीपन
रोयी , गिड़गिड़ाई ..की मिन्नतें
दर्द दुबारा ये सह न पाऊंगी
सिसक सिसक कर उसे बतलाई।
नहीं सुनना था उसे,
नहीं सुन पाया वो।
नहीं रुकना था उसे,
नहीं रुक पाया वो।
तेज उफान आया नदी में,
क्रोध और अवसाद
छाया मन में,
फिर छला था
नेह जता कर किसी ने।
आवाज देती..लहरें,
उठती और गिरती
किनारों से टकराती,
हो गई घायल।
बीत गए असंख्य क्षण
उसकी वापसी की आस में
लेकिन सामने था, तो सिर्फ शून्य।
हो गई नदी फिर से मौन..
छा गई निरवता।
लेकिन अबकी बार,
नहीं जमा कुछ तलहटी में
कुछ बर्फ सा,
कुछ पत्थर सा।
बस रह गया भीतर
रक्तिम हृदय..
और लाल रक्त।
जो रिस रिस कर
घुलता जा रहा है
मिलता जा रहा है
अपने ही बेरंग पानी में…।।
सह ना सकी ये देख नदी
ये बिछड़न ये एकाकीपन
रोयी , गिड़गिड़ाई ..की मिन्नतें
दर्द दुबारा ये सह न पाऊंगी
सिसक सिसक कर उसे बतलाई।
नहीं सुनना था उसे,
नहीं सुन पाया वो।
नहीं रुकना था उसे,
नहीं रुक पाया वो।
तेज उफान आया नदी में,
क्रोध और अवसाद
छाया मन में,
फिर छला था
नेह जता कर किसी ने।
आवाज देती..लहरें,
उठती और गिरती
किनारों से टकराती,
हो गई घायल।
बीत गए असंख्य क्षण
उसकी वापसी की आस में
लेकिन सामने था, तो सिर्फ शून्य।
हो गई नदी फिर से मौन..
छा गई निरवता।
लेकिन अबकी बार,
नहीं जमा कुछ तलहटी में
कुछ बर्फ सा,
कुछ पत्थर सा।
बस रह गया भीतर
रक्तिम हृदय..
और लाल रक्त।
जो रिस रिस कर
घुलता जा रहा है
मिलता जा रहा है
अपने ही बेरंग पानी में…।।


