Chal roohan ch mil jisma ton adikh ho jayiye
Jiwe pani vich boonda ovein ikk-mikk ho jayiye..!!
ਚੱਲ ਰੂਹਾਂ ‘ਚ ਮਿਲ ਜਿਸਮਾਂ ਤੋਂ ਅਦਿੱਖ ਹੋ ਜਾਈਏ
ਜਿਵੇਂ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਬੂੰਦਾਂ ਓਵੇਂ ਇੱਕ-ਮਿੱਕ ਹੋ ਜਾਈਏ..!!
Chal roohan ch mil jisma ton adikh ho jayiye
Jiwe pani vich boonda ovein ikk-mikk ho jayiye..!!
ਚੱਲ ਰੂਹਾਂ ‘ਚ ਮਿਲ ਜਿਸਮਾਂ ਤੋਂ ਅਦਿੱਖ ਹੋ ਜਾਈਏ
ਜਿਵੇਂ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚ ਬੂੰਦਾਂ ਓਵੇਂ ਇੱਕ-ਮਿੱਕ ਹੋ ਜਾਈਏ..!!
चलो किसी पुराने दौर की बात करते हैं,
कुछ अपनी सी और कुछ अपनों कि बात करते हैं…
बात उस वक्त की है जब मेरी मां मुझे दुलारा करती थी,
नज़रों से दुनिया की बचा कर मुझे संवारा करती थी,
गलती पर मेरी अकेले डांट कर पापा से छुपाया करती थी,
और पापा के मुझे डांटने पर पापा से बचाया करती थी…
मुझे कुछ होता तो वो भी कहाँ सोया करती थी,
देखा है मैंने,
वो रात भर बैठकर मेरे बाल संवारा करती थी,
घर से दूर आकर वो वक्त याद आता है,
दिन भर की थकान के बाद अब रात के खाने में, कहां मां के हाथ का स्वाद आता है,
मखमल की चादर भी अब नहीं रास आती है,
माँ की गोद में जब सिर हो उससे अच्छी नींद और कहाँ आती है…
Pal vi tu metho dur nahi hunda
Subah shaam khayal rehnda e tera..!!
Rabb hi rakha es masum jaan da
Pta nahi mohobbat ch ki banna e mera..!!
ਪਲ ਵੀ ਤੂੰ ਮੈਥੋਂ ਦੂਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ
ਸੁਬਾਹ ਸ਼ਾਮ ਖ਼ਿਆਲ ਰਹਿੰਦਾ ਏ ਤੇਰਾ..!!
ਰੱਬ ਹੀ ਰਾਖਾ ਇਸ ਮਾਸੂਮ ਜਾਨ ਦਾ
ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਮੋਹੁੱਬਤ ‘ਚ ਕੀ ਬਣਨਾ ਏ ਮੇਰਾ..!!