
par aj fir kalam uthayi hai
uski yaad me
waise to #arsh kabhi bolkar byaan nahi karta
par aaj likhega dil ke dard ko apni shayari ke har alfaaz se

akhaa vich hanju saade rehan lagg paye
asi bulla ton jyaada kalamaa ton gall dasan lag paye
loki puchde ne raaz khamoshi da saaddi
ohna nu ki dasiye ik sakhas karke asi duniyaa to vakh rehn lag paye
ਅਖਾਂ ਵਿੱਚ ਹੰਜੂ ਸਾਡੇ ਰਹਿਣ ਲੱਗ ਪਏ
ਅਸੀਂ ਬੁੱਲ੍ਹਾਂ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਕਲਮਾਂ ਤੋਂ ਗਲਾਂ ਦਸਣ ਲੱਗ ਪਏ
ਲੋਕੀਂ ਪੁਛਦੇ ਨੇ ਰਾਜ਼ ਖਾਮੋਸ਼ੀ ਦਾ ਸ਼ਾਡੀ
ਓਹਨਾਂ ਨੂੰ ਕੀ ਦੱਸੀਏ ਇੱਕ ਸ਼ਖਸ ਕਰਕੇ ਅਸੀਂ ਦੁਨੀਆਂ ਤੋਂ ਵੱਖ ਰਹਿਣ ਲੱਗ ਪਏ
—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷
राजनीति की दुनिया में खेल बहुत है,
कोई जीता है, कोई हारा है।
सत्ता की भूख और वाद-विवाद,
मन में जलती चिंगारी है।
राजनेताओं की रंगीन छलावा,
जनता को वहमों में बँधाता है।
कुछ वादे खाली और कुछ झूले धूले,
आम आदमी को खोखला बनाता है।
वाद-विवाद के आगे सच्चाई छिपती,
लोकतंत्र की मूल्यों पर भारी है।
शोर और तामझाम में खो गई है,
सम्मान, सद्भाव और आदर्शि है।
नीतिबद्धता और समर्पण की कमी,
राजनीति को कर रही है मिट्टी।
सच्ची सेवा की बजाए प्रतिष्ठा,
हौसले को तोड़ रही है मिट्टी।
चाहे जितना बदले युगों का सफ़र,
राजनीति का रंग हर बार वही।
प्रशासनिक शक्ति की लालसा में,
जनता भूल जाती है खुद को वही।