ਚੁੱਪ ਜਿਹੇ ਜਰੂਰ ਆ
ਪਰ ਸਾਨੂੰ ਸੋਰ ਨਹੀ ਚਾਹਿਦਾ
ਬਾਬੇ ਇੱਕ ਨੇ ਹੀ ਬਸ ਕਰਤੀ
ਸਾਲਾ ਸਾਨੂੰ ਹੁਣ ਕੋਈ ਹੋਰ ਨਹੀ ਚਾਹਿਦਾ
ਚੁੱਪ ਜਿਹੇ ਜਰੂਰ ਆ
ਪਰ ਸਾਨੂੰ ਸੋਰ ਨਹੀ ਚਾਹਿਦਾ
ਬਾਬੇ ਇੱਕ ਨੇ ਹੀ ਬਸ ਕਰਤੀ
ਸਾਲਾ ਸਾਨੂੰ ਹੁਣ ਕੋਈ ਹੋਰ ਨਹੀ ਚਾਹਿਦਾ
जिन्हें मोहब्बत थी मेरी मुस्कानों से
वे आज मेरा जिस्म चाहने लगे हैं
जो चाहते थे मैं हमेशा मुस्कुराऊं
वे आज मेरी मुस्कान ही छीनने लगे हैं
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
उठता है तूफान सीने में जब
जहन में सवाल इक आता है
जब जाना ही है दूर तो
क्यों करीब कोई आता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
जिसे देखना भी नही मुनासिब
आंखे बंद कर करीब उसी को पता है
ढूंढ ले खामियां उसकी हजार पर
दिल तो आज भी बेहतर उसी को बताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….
सपने देखता है नई दुनिया बसाने के तू
नींद तेरी आज भी वही चुराता है
बेख्याल होने का करले तमसील भले
मिलने का ख्याल तो आज भी सताता है
यादों का इक महल रोज बनता
और ढह जाता है……….