milna tujhse aitfaak tha
pyar karna majhboori
bichhad ke jaana marji thi
shodh kar dastaan adhoori
मिलना तुझसे एतेफाक था
प्यार करना मजबूरी
बिछड़ के जाना मर्जी थी
छोड़ कर दास्तान अधूरी
milna tujhse aitfaak tha
pyar karna majhboori
bichhad ke jaana marji thi
shodh kar dastaan adhoori
मिलना तुझसे एतेफाक था
प्यार करना मजबूरी
बिछड़ के जाना मर्जी थी
छोड़ कर दास्तान अधूरी
“Ek Ajeeb si Kashish thi uske wajud me..
Usne kabhi apnaya bhi nhi
Aur kisi ka hone bhi nhi diya….”
वो खुद भूखा रहकर तुम्हारा पेट सींच रहा है,
देखो आज,
चेहरे पर मुस्कान लिए भीगी पलकें मीच रहा है,
दो वक्त की रोटी, रोटी देने वालों को नसीब नहीं,
वो कौनसा तुम्हारी भारी जेबों से नोट खीच रहा है....
थोड़ी खुशियां उनकी झोली में भी नसीब हो,
आज दूर है कल वापस मिट्टी के करीब हो,
इक सैलाब ने खूब कोहराम मचाया,
ऐसा ना हो के दूसरा भी करीब हो...