ajj ve apni likhat cha utarde ha
ohna de isqa nu
bhawa asi ona de dil cho utar gaye
ajj ve apni likhat cha utarde ha
ohna de isqa nu
bhawa asi ona de dil cho utar gaye
Ajj vi apni likhat ch utaarde ha
ohna de ishq nu
bhawein asi ohna de dil cho utar gaye💔
ਅੱਜ ਵੀ ਆਪਣੀ ਲਿਖਤ ‘ਚ ਉਤਾਰਦੇ ਹਾਂ
ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਇਸ਼ਕ ਨੂੰ
ਭਾਵੇਂ ਅਸੀਂ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਦਿਲ ‘ਚੋਂ ਉੱਤਰ ਗਏ💔
अंकुर मिट्टी में सोया था सपने मै खोया था
नन्हा बीज हवा ने लाकर एक जगह बोया था।
तभी बीज ने ली अंगड़ाई देह जरा सी पाई
आंख खोलकर बाहर आया, दुनिया पड़ी दिखाई
खाद्य मिली पानी भी पाया ऐसे जीवन आया
ऊपर बड़ा इधर, धरती में नीचे उधर समाया।
तने डालिया पत्ते आए और फल मुस्कराए
नन्हा बीज वृक्ष बनकर धरती पर लहराए।
जीता मरता रोगी होता दुख आने पर सोता
वृक्ष सांस लेता बढ़ता है जगता है फिर सोता।
रोज शाम को चिड़िया आती सारी रात बिताती
बड़े सवेरे जाग वृक्ष, पर ची ची ची ची गाती।
छाया आती बड़ी सुआती सब टोली झूट जाती
तरह तरह के खेल वर्क्ष के नीचे बैठ रचती।
इक बात दिल मे आती है देखू उसे जितनी दफा।
हमने तो मोहब्बत के किस्से सुने थे अब तो दोस्त भी होते है बेबफा ।।
ik baat dil me aati hai dekhu use jitni dafaa
hamne to mohobat ke kisse sune the ab to dost bhi hote hai bewafa