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dil cho utar gaye || 2 lines dard bhari shayari punjabi

ajj ve apni likhat cha utarde ha
ohna de isqa nu
bhawa asi ona de dil cho utar gaye

Title: dil cho utar gaye || 2 lines dard bhari shayari punjabi

dil cho utar gaye || 2 lines dard bhari shayari punjabi

Ajj vi apni likhat ch utaarde ha
ohna de ishq nu
bhawein asi ohna de dil cho utar gaye💔

ਅੱਜ ਵੀ ਆਪਣੀ ਲਿਖਤ ‘ਚ ਉਤਾਰਦੇ ਹਾਂ
ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਇਸ਼ਕ ਨੂੰ
ਭਾਵੇਂ ਅਸੀਂ ਉਹਨਾਂ ਦੇ ਦਿਲ ‘ਚੋਂ ਉੱਤਰ ਗਏ💔

Title: dil cho utar gaye || 2 lines dard bhari shayari punjabi

Best Punjabi - Hindi Love Poems, Sad Poems, Shayari and English Status


saanu bechain karan waleyaa || dard e shayari bewafa

ਸਾਨੂੰ ਬੇਚੈਨ ਕਰਨ ਵਾਲੇਆਂ
ਤੇਨੂੰ ਵੀ ਕਿਤੇ ਚੈਨ ਨਾ ਮਿਲ਼ੇ
ਤੂੰ ਵੀ ਤੜਫੇ ਹਰ ਖੁਸ਼ੀ ਲਈ
ਤੇ ਤੈਨੂੰ ਦੁਖਾਂ ਤੋਂ ਬਗੈਰ ਕੁੱਝ ਨਾ ਮਿਲ਼ੇ

ਬੱਸ ਇੱਕ ਤੇਰੇ ਕਰਕੇ ਨਫ਼ਰਤ ਹੋ ਗਈਆਂ ਇਸ਼ਕ ਤੋਂ
ਹੁਣ ਨਾਂ ਤੇਰਾ ਤੇ ਮਹੋਬਤ ਦਾ ਨਹੀਂ ਲਵਾਂਗੇ
ਬਾਹਲ਼ਾ ਗ਼ਰੂਰ ਸੀ ਤੈਨੂੰ ਆਪਣੇ ਆਪ ਤੇ
ਖ਼ੁਦਾ ਤੋਂ ਹੱਥ ਜੋੜ ਗੁਜ਼ਾਰੀ ਸ਼ਾਹਾ ਹੈ ਮੇਰੀ ਤੇਰਾਂ ਏਹ ਗਰੂਰ ਨਾ ਰਵੇ

ਤੂੰ ਗਿਰ ਜਾਵੇ ਆਪਣੀ ਹੀ ਨਜ਼ਰਾਂ ਵਿੱਚ
ਤੈਨੂੰ ਪਿਆਰ ਤੇ ਕਿਸੇ ਦੀ ਨਫ਼ਰਤ ਤੱਕ ਵੀ ਨਾ ਮਿਲ਼ੇ
ਤੂੰ ਤੜਫ਼ੇ ਮੇਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਹਾਰੇ ਦੇ ਲਈ
ਤੇ ਤੈਨੂੰ ਆਪਣੇ ਆ ਦਾ ਵੀ ਸਾਥ ਨਾ ਮਿਲ਼ੇ

—ਗੁਰੂ ਗਾਬਾ 🌷

Title: saanu bechain karan waleyaa || dard e shayari bewafa


Hindi kavita || बहती नदी – सी || hindi poetry

थी मै,शांत चित्त बहती नदी – सी
तलहटी में था कुछ जमा हुआ
कुछ बर्फ – सा ,कुछ पत्थर – सा।
शायद कुछ मरा हुआ..
कुछ अधमरा सा।
छोड़ दिया था मैंने
हर आशा व निराशा।
होंठो में मुस्कान लिए
जीवन के जंग में उलझी
कभी सुलगी,कभी सुलझी..
बस बहना सीख लिया था मैंने।
जो लगी थी चोट कभी
जो टूटा था हृदय कभी
उन दरारों को सबसे छुपा लिया था
कर्तव्यों की आड़ में।
फिर एक दिन..
हवा के झोंके के संग
ना जाने कहीं से आया
एक मनभावन चंचल तितली
था वो जरा प्यासा सा
मनमोहक प्यारा सा।
खुशबूओं और पुष्पों
की दुनिया छोड़
सारी असमानताओं और
बंधनों को तोड़
सहमी – बहती नदी को
खुलकर बहना सीखा गया,
अपने प्रेम की गरमी से
बर्फ क्या पत्थर भी पिघला गया।
पाकर विश्वास कोमल भावों से जोड़े नाते का
सारी दबी अपेक्षाएं हो गई फिर जीवंत
लेकिन क्या पता था –
होगा इसका भी एक दिन अंत !
तितली को आयी अपनों की याद
मुड़ चला बगिया की ओर
सह ना सकी ये देख नदी
ये बिछड़न ये एकाकीपन
रोयी , गिड़गिड़ाई ..की मिन्नतें
दर्द दुबारा ये सह न पाऊंगी
सिसक सिसक कर उसे बतलाई।
नहीं सुनना था उसे,
नहीं सुन पाया वो।
नहीं रुकना था उसे,
नहीं रुक पाया वो।
तेज उफान आया नदी में,
क्रोध और अवसाद
छाया मन में,
फिर छला था
नेह जता कर किसी ने।
आवाज देती..लहरें,
उठती और गिरती
किनारों से टकराती,
हो गई घायल।
बीत गए असंख्य क्षण
उसकी वापसी की आस में
लेकिन सामने था, तो सिर्फ शून्य।
हो गई नदी फिर से मौन..
छा गई निरवता।
लेकिन अबकी बार,
नहीं जमा कुछ तलहटी में
कुछ बर्फ सा,
कुछ पत्थर सा।
बस रह गया भीतर
रक्तिम हृदय..
और लाल रक्त।
जो रिस रिस कर
घुलता जा रहा है
मिलता जा रहा है
अपने ही बेरंग पानी में…।।

Title: Hindi kavita || बहती नदी – सी || hindi poetry