
Kalam hath ch phad ke eve
likhda reha me dil de alphaaz
oh ki faeda likhne da
jad pdhna na kise eve khole kyon dil de raaz

Kalam hath ch phad ke eve
likhda reha me dil de alphaaz
oh ki faeda likhne da
jad pdhna na kise eve khole kyon dil de raaz
टुकड़े कितने किए तूने बदला पुराना लगता है
तेरे लोट आने की बात अब बहाना लगता है
वैसे तो भूलते नही है हम पर
तेरे साथ बिता वक्त अब पुराना लगता है
“फिर आज युंहिं मौसम बदला, चहकती
देखो हर एक डाल है..
मद्धम सी बरसात हुई, छिल गई कई पेड़ों की छाल है..
हर पत्ते हर डाली ने पूछा, क्या दर्द हुआ? क्या तेरा हाल है..
कहा हुआ हूं, नया मैं फिर से, क्या जानो तुम कुदरत कमाल है..
मुझको ताकत दी है इतनी, शक्ति मेरी बेमिसाल है..
हर जीव में सांसें भरता हूं, सब करते मेरा इस्तेमाल है..
काटेंगे मुझे तो भुगतेंगे, कुदरत का कहर सबसे विशाल है..
बे-मौसम जो मौसम बदल रहे हैं, जवाब पता है, फिर भी सवाल है..”