हवा चलती है सुनहरी
तुम हो मेरी नन्हि गिलहरी..
प्यार करता हूं मैं बहुत तुमसे,
अब जताने आया हूं प्यार तुमसे…
क्या तुम नहीं जताओगे मुझे अपना प्यार
तब तक मैं करता रहूंगा तुम्हारा इंतजार….
Nabendu Baroi
हवा चलती है सुनहरी
तुम हो मेरी नन्हि गिलहरी..
प्यार करता हूं मैं बहुत तुमसे,
अब जताने आया हूं प्यार तुमसे…
क्या तुम नहीं जताओगे मुझे अपना प्यार
तब तक मैं करता रहूंगा तुम्हारा इंतजार….
Nabendu Baroi
यादें अक्सर होती हैं सताने के लिए,
कोई रूठ जाता है फिर मान जाने के लिए,
रिश्ते निभाना कोई मुश्किल तो नहीं,
बस दिलों मे प्यार चाहिए उसे निभाने के लिए!
लिखता मैं किसान के लिए
मैं लिखता इंसान के लिए
नहीं लिखता धनवान के लिए
नहीं लिखता मैं भगवान के लिए
लिखता खेत खलियान के लिए
लिखता मैं किसान के लिए
नहीं लिखता उद्योगों के लिए
नहीं लिखता ऊँचे मकान के लिए
लिखता हूँ सड़कों के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
क़लम मेरी बदलाव बड़े नहीं लाई
नहीं उम्मीद इसकी मुझे
खेत खलियान में बीज ये बो दे
सड़क का एक गढ्ढा भर देती
ये काफ़ी इंसान के लिए
लिखता हूँ किसान के लिए
लिखता मैं इंसान के लिए
आशा नहीं मुझे जगत पढ़े
पर जगत का एक पथिक पढ़े
फिर लाए क्रांति इस समाज के लिए
इसलिए लिखता मैं दबे-कुचलों के लिए
पिछड़े भारत से ज़्यादा
भूखे भारत से डरता हूँ
फिर हरित क्रांति पर लिखता हूँ
फिर किसान पर लिखता हूँ
क्योंकि
लिखता मैं किसान के लिए
लिखता मै इंसान के लिए