हवा चलती है सुनहरी
तुम हो मेरी नन्हि गिलहरी..
प्यार करता हूं मैं बहुत तुमसे,
अब जताने आया हूं प्यार तुमसे…
क्या तुम नहीं जताओगे मुझे अपना प्यार
तब तक मैं करता रहूंगा तुम्हारा इंतजार….
Nabendu Baroi
हवा चलती है सुनहरी
तुम हो मेरी नन्हि गिलहरी..
प्यार करता हूं मैं बहुत तुमसे,
अब जताने आया हूं प्यार तुमसे…
क्या तुम नहीं जताओगे मुझे अपना प्यार
तब तक मैं करता रहूंगा तुम्हारा इंतजार….
Nabendu Baroi
ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
मैं अब के साल परिंदों का दिन मनाऊँगा
मिरी क़रीब के जंगल से बात हो गई है
बिछड़ के तुझ से न ख़ुश रह सकूँगा सोचा था
तिरी जुदाई ही वज्ह-ए-नशात हो गई है
बदन में एक तरफ़ दिन तुलूअ’ मैं ने किया
बदन के दूसरे हिस्से में रात हो गई है
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर
ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
रहेगा याद मदीने से वापसी का सफ़र
मैं नज़्म लिखने लगा था कि ना’त हो गई है
Kise da dil bachonde bachonde khud da dil tadva baithe
Asi jyonde jee hi Mar rhe haan Enna kise nu chaa baithe