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मरहम घाव ढूंढ रहे हैं, पत्ते छांव ढूंढ रहे हैं,
मंजिलें थोड़ी दूर हैं, रास्ते पांव ढूंढ रहे हैं...
गुमराह करने वालों की भीड़ बहुत बड़ी है
वहां मत जाना वो चलने को बस दाव ढूंढ रहे हैं...
बेच देंगे वो सरकारें भी इक दिन
मिलने का सही भाव ढूंढ रहे हैं...
बेगुनाहों को बेजान करना आदत है इनकी
बस, मूंछों को देने के लिए झूठा ताव ढूंढ रहे
हैं...
Uske Chale Jaane ke baad
ham mohobbat nahi karte kisi se
shotti c zindagi hai
kis kis ko ajhmaate rahenge
उसके चले जाने के बाद…
हम महोबत नहीं करते किसी से,
छोटी सी जिन्दगी है…
किस किस को अजमाते रहेंगे.